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कुल्लू, 30 जून। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में प्रसूता मंजू शर्मा उर्फ रजनी की मौत के मामले ने अब बड़ा जनआंदोलन का रूप ले लिया है। घटना के 9 दिन बाद रविवार को सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए। ढालपुर चौक से शुरू हुई रोष रैली अस्पताल पहुंची, जहां प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल के मुख्य सुरक्षा गेट पर धक्का-मुक्की की और परिसर में प्रवेश करने का प्रयास किया। इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल का पुतला भी फूंका गया तथा अस्पताल परिसर में आमरण अनशन शुरू कर दिया गया।
मंजू शर्मा उर्फ रजनी (23), पत्नी सतीश कुमार, निवासी सेराज क्षेत्र (जिला मंडी) की 20 जून को क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में सिजेरियन डिलीवरी हुई थी। उन्होंने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया, लेकिन डिलीवरी के लगभग 24 घंटे बाद 21 जून की सुबह उनकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि दर्द और हाई ब्लड प्रेशर की लगातार शिकायत के बावजूद अस्पताल स्टाफ ने गंभीरता नहीं दिखाई। उनका कहना है कि समय पर उचित उपचार और देखभाल नहीं मिलने के कारण मंजू की जान चली गई।
घटना के बाद 21 जून को ही अस्पताल में हंगामा हुआ था और मृतका के पति सतीश कुमार ने स्वास्थ्य विभाग को शिकायत सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद लगातार कई दिनों तक परिजनों और विभिन्न संगठनों ने विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
23 से 27 जून के बीच ABVP कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने अस्पताल के बाहर धरना-प्रदर्शन, रैली और मशाल जुलूस निकाले। मृतका के परिजनों ने भी वीडियो संदेशों के माध्यम से आरोप लगाया कि अस्पताल स्टाफ ने उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया और समय रहते उचित कदम नहीं उठाए।
29 जून को आंदोलन और उग्र हो गया। सामाजिक कार्यकर्ता बलदेव उर्फ बंटी सराजी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। प्रदर्शन के दौरान "मंजू हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं" के नारे गूंजते रहे। बंटी सराजी ने कहा कि घटना को 9 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक केवल जांच कमेटी बनाकर मामला टालने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दोषियों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
मृतका के भाई दिनेश शर्मा ने कहा कि डॉक्टरों को भगवान का दर्जा दिया जाता है, लेकिन यदि लापरवाही हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी पीड़ा न झेलनी पड़े।
उधर अस्पताल प्रशासन ने मामले की जांच के लिए वरिष्ठ चिकित्सकों की कमेटी गठित होने की पुष्टि की है। मेडिकल सुपरिंटेंडेंट ने भी मामले से जुड़े कुछ बयानों पर खेद व्यक्त किया है। वहीं राज्य महिला आयोग ने भी इस मामले का संज्ञान लिया है और जांच प्रक्रिया जारी है। इस बीच प्रदेश की राजनीति में भी मामला गरमा गया है और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच पूरी की जाए, यदि किसी डॉक्टर या नर्स की लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ कड़ी विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
