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हिमाचल: इंजेक्शन लगने के बाद 45 दिन की बच्ची की मौत, अस्पताल पर लापरवाही का आरोप

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न्यूज अपडेट्स 
शिमला, 05 जून। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के दीन दयाल उपाध्याय (डीडीयू) जोनल अस्पताल (रिपन) में बुधवार को एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहां सुबह टीकाकरण (वैक्सीनेशन) के बाद दोपहर को 45 दिन की एक मासूम बच्ची की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि स्वास्थ्य केंद्र में इंजेक्शन लगने के तीन घंटे के भीतर ही बच्ची का शरीर सुन्न पड़ गया था। इस दर्दनाक घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं, वहीं परिजनों की ओर से पुलिस में शिकायत दी गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक बच्ची की पहचान संजौली निवासी कियांशी के रूप में हुई है। बच्ची के दादा दिनेश कुमार ने बताया कि बुधवार सुबह करीब 11:00 बजे माता-पिता बच्ची को नियमानुसार 6 सप्ताह (45 दिन) पर लगने वाला नियमित टीका लगवाने डीडीयू अस्पताल ले गए थे। वहां चिकित्सकों और स्टाफ ने इंजेक्शन लगाने के बाद करीब आधा घंटा बच्ची को अपनी देखरेख में रखा और सब सामान्य होने पर घर भेज दिया। दोपहर करीब 2:00 बजे संजौली स्थित घर पर बच्ची ने अचानक शारीरिक प्रतिक्रिया देनी बंद कर दी और उसके नाक से खून बहने लगा। घबराए परिजन उसे तुरंत इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) के आपातकालीन विभाग लेकर भागे। आईजीएमसी के चिकित्सकों ने बच्ची को बचाने के लिए काफी देर तक गहन जांच की और सीपीआर (CPR) भी दिया, लेकिन तब तक बच्ची का शरीर नीला पड़ चुका था। डॉक्टरों ने अंततः उसे मृत घोषित कर दिया।

वहीं, शाम को आईजीएमसी के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग ने बच्ची के शव का पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम की शुरुआती जांच में अभी सीधे तौर पर टीके (वैक्सीन) के प्रभाव से मौत होने की बात सामने नहीं आई है। डॉक्टरों ने मौत के असली और सटीक कारणों का पता लगाने के लिए बच्ची का बिसरा सुरक्षित रख लिया है, जिसे जांच के लिए स्टेट फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) जुन्गा भेजा जा रहा है। एफएसएल की रिपोर्ट के अनुसार ही रिपोर्ट के असल कारणों का पता लग सकेगा।

गौरतलब है कि शिशुओं को जन्म के 45 दिन बाद (6 सप्ताह) बेहद महत्वपूर्ण पेंटावेलेंट, इंजेक्टेबल पोलियो और न्यूमोकोकल वैक्सीन लगाई जाती है। इसके साथ ही रोटा वायरस और ओरल पोलियो की ड्रॉप्स भी पिलाई जाती हैं। महज 45 दिन पहले घर में किलकारियां गूंजने से खुशियों से सराबोर परिवार पर इस घटना से दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। आईजीएमसी के फोरेंसिक विभाग के बाहर जब बच्ची का पोस्टमार्टम हो रहा था, तो वहां का माहौल बेहद गमगीन था। मां क्षितिजा और पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। एएसपी अभिषेक ने बताया कि परिजनों की ओर से पुलिस में शिकायत दी गई है। मामले में कार्रवाई की जाएगी।

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