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शिमला, 04 जून। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के भीतर लंबे समय से सुलग रही अंतर्कलह और असंतोष की चिंगारी अब पूरी तरह से भड़क उठी है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार की कार्यप्रणाली से नाराज होकर पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष, पूर्व विधायक और वर्तमान कैबिनेट मंत्री चौधरी चंद्र कुमार के बेटे नीरज भारती ने अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है। नीरज भारती का यह कदम हिमाचल कांग्रेस के लिए एक बहुत बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
इस्तीफा देने के साथ ही नीरज भारती ने सोशल मीडिया पर एक के बाद एक बेहद आक्रामक पोस्ट डालकर सुक्खू सरकार की पूरी कलई खोल कर रख दी है। उन्होंने साफ किया है कि सरकार की मौजूदा व्यवस्था और कार्यशैली से वह खुद को पूरी तरह से असंतुष्ट महसूस कर रहे हैं।
अध्यक्ष विनय कुमार को भेजा इस्तीफा
नीरज भारती ने 4 जून, 2026 को अपना लिखित त्यागपत्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं विधायक विनय कुमार और जिला कांग्रेस अध्यक्ष अनुराग ठाकुर को भेज दिया।
भारती ने सुक्खू सरकार की उधेड़ी परतें
बता दें कि इस्तीफा देने से पहले नीरज भारती पिछले रोज से ही अपने सोशल मीडिया पर एक के बाद एक पोस्ट डाल कर अपनी भड़ास सुक्खू सरकार पर निकाल रहे थे। निकाय चुनाव को लेकर उन्होंने सुक्खू सरकार को जमकर घेरा और उसके बाद उन्होंने कई ऐसे पोस्टें डाली जिसने सुक्खू सरकार की अंदरूनी परतों को उखाड़ कर रख दिया है। तो आईए जानते हैं कि नीरज भारती ने अपनी पोस्ट में क्या क्या लिखा....
इस्तीफा देने के बाद नीरज भारती की पोस्टें...
कोई एहसान नहीं किया था प्रदेश कांग्रेस का उपाध्यक्ष बना कर..... भाजपा के खिलाफ लड़ाइयां लड़ी हैं..... संघर्ष किया है..... तुम्हारी तरह जूते चाट कर कोई पद हासिल नहीं किया था.
महीने के 5 अटैची इक्कठे होते है 2 खुद रखे जाते हैं 3 दिल्ली भेजे जाते हैं....
हिमाचल प्रदेश के इतिहास में लिखा जाएगा कि अगर हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस पार्टी का किसी ने बेड़ागर्क किया तो वो 2 दो सुख ही थे.....
जिसने भाजपा सरकार के समय हिमाचल प्रदेश में विपक्ष के तौर पर मोर्चा संभाल कर रखा..... विधानसभा के अंदर भी और बाहर भी भाजपा के खिलाफ कांग्रेस को मजबूती देने का काम किया..... संघर्ष किया..... पार्टी के लिए लड़ाइयां लड़ी..... लेकिन जब मुख्यमंत्री बनाने की बारी आई तो उसे ही इग्नोर कर दिया..... और ऐसे व्यक्ति को मुख्यमंत्री बना दिया..... जो कैंपेन कमेटी का चेयरमैन बनने के बावजूद अपने विधानसभा क्षेत्र से बाहर ही नहीं निकला....
4 और 64 का अंतर रहेगा..... जिसको शक है पोस्ट सेव करके रख लेना..... कुछ दिनों पहले तक ये आंकड़ा 8 और 60 का था..... लेकिन स्थानीय निकायों और पंचायती राज चुनावों के परिणामों के बाद दोबारा अपडेट हुआ है.....
जिन विधायकों (कुछ मंत्रियों) ने सुक्खू जी का समर्थन किया था मुख्यमंत्री बनाने के लिए..... वो भी आज की तारीख में, एक-दो को छोड़ कर, बंद कमरों में सिसकियां लेते हैं..... लेकिन खुल कर बोल नहीं पाते..... उनको भी पता है कि कुछ बोलेंगे तो कारण बताओ नोटिस आ जाएगा..... लेकिन दिल्ली में बैठे लोग शायद वो कारण देखना ही नहीं चाहते.....
बंद कमरों में सुनता कौन है..... इसीलिए सोशल मीडिया पर आना पड़ता है..... ताकि लोगों को भी सच्चाई पता चले..... जिस तरह अपराधी सिर्फ जुल्म करने वाला नहीं होता..... जुल्म सहने वाला भी कहीं न कहीं उतना ही जिम्मेदार होता है..... वैसे ही सिर्फ अनुशासन के डर से चुप बैठने वाला भी पार्टी के लिए उतना ही गुनाहगार है..... जितना पार्टी को धोखा देने वाला....
