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हिमाचल: कर्मचारियों के गृह जिले में नहीं होंगे तबादले, हाईकोर्ट ने पॉलिसी में बदलाव के लिए आदेश

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शिमला, 20 मार्च। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य कैडर के कर्मचारियों की तबादला नीति को लेकर अहम निर्देश जारी करते हुए सरकार को इसमें जरूरी बदलाव करने को कहा है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि ऐसे प्रावधान किए जाएं, जिनके तहत कोई भी कर्मचारी अपनी प्रारंभिक नियुक्ति के बाद लगातार 2 या 3 बार अपने ही गृह जिले में तैनात न हो सके।

न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने कहा कि यदि कोई कर्मचारी पहले से अपने गृह जिले में तैनात रह चुका है, तो उसका तबादला उसी जिले के भीतर दूसरी जगह करने के बजाय किसी अन्य जिले में किया जाना चाहिए। इसके साथ ही अदालत ने यह भी सुझाव दिया कि दो तैनाती स्थानों के बीच कम से कम 100 से 150 किलोमीटर की दूरी होनी चाहिए, ताकि पक्षपात या भेदभाव की संभावना खत्म हो सके।

कोर्ट ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिए कि कर्मचारियों की तैनाती से जुड़ी पूरी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराने पर विचार किया जाए। इस ऑनलाइन व्यवस्था में यह साफ दिखना चाहिए कि कोई कर्मचारी किस स्थान पर कितने समय तक कार्य कर चुका है। अदालत ने सुझाव दिया कि जब कोई कर्मचारी किसी स्थान पर निर्धारित अवधि पूरी कर ले, तो उसके नाम के साथ एक विशेष संकेत या लाल निशान दिखाया जाए, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि उसने अपनी सामान्य सेवा अवधि पूरी कर ली है।

अदालत के अनुसार तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के लिए एक स्थान पर तैनाती की अवधि 3 वर्ष और अन्य कर्मचारियों के लिए 2 वर्ष तय की जा सकती है। इसके अलावा विभिन्न स्थानों पर खाली पदों की जानकारी भी ऑनलाइन उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि तबादलों की प्रक्रिया पारदर्शी और स्पष्ट हो सके। कोर्ट ने कहा कि यह कदम इसलिए जरूरी है, क्योंकि आम धारणा बन गई है कि तबादला प्रक्रिया एक तरह का “उद्योग” बन गई है।

हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को इन सभी बिंदुओं पर अपना जवाब देने के निर्देश दिए हैं और मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल 2026 को तय की है। साथ ही अदालत ने आदेश की प्रति शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व, आईपीएच और लोक निर्माण विभाग के प्रधान सचिवों को भी भेजने को कहा है, क्योंकि अधिकतर तबादले इन्हीं विभागों में होते हैं।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए यह भी कहा कि यह चिंता का विषय है कि कई कर्मचारी अपनी नियुक्ति वाली जगह पर ही लंबे समय तक बने रहना चाहते हैं और दूसरी जगह जाने से बचते हैं। इससे विभागीय कामकाज प्रभावित होता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य कैडर का कोई भी कर्मचारी यह नहीं मान सकता कि उसे अपने घर के पास ही नौकरी करने का कोई अधिकार है।

जानकारी के अनुसार याचिकाकर्ता अगस्त 2019 से मंडी में ग्रामीण विकास विभाग में वरिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत है। बीच में उसका तबादला भुंतर किया गया था, लेकिन उसने उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी और व्यावहारिक रूप से मंडी में ही कार्य करता रहा। इसी मामले पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने यह विस्तृत टिप्पणी और निर्देश जारी किए हैं।

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