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हिमाचल: सामूहिक अवकाश पर गए राजस्व कर्मी, कारण बताओ नोटिस जारी, नायब तहसीलदार तलब

Anil Kashyap
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न्यूज अपडेट्स 
सिरमौर, 20 फरवरी। सिरमौर जिले की माजरा उप तहसील में सामूहिक अवकाश लेकर राजस्थान यात्रा पर गए राजस्व कर्मियों का मामला अब प्रशासनिक सख्ती और संभावित भ्रष्टाचार जांच तक पहुंच गया है। उपायुक्त प्रियंका वर्मा ने नायब तहसीलदार को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है, जबकि पांवटा साहिब के एसडीएम गुंजीत चीमा द्वारा जारी कारण बताओ नोटिसों के जवाब के बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई तय होगी। सूत्रों का कहना है कि संलिप्त कर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की पूरी संभावना है।

जानकारी के अनुसार 12 और 13 फरवरी को नायब तहसीलदार सहित तीन पटवारी, एक कानूनगो और दो महिलाओं समेत तीन क्लर्क राजस्थान गए थे। संबंधित कर्मियों ने कथित तौर पर रिश्तेदार की शादी और बीमारी का हवाला देकर कैजुअल लीव ली, जबकि माजरा के तहसीलदार इंद्र कुमार मेडिकल लीव पर थे। मामला तब खुला जब यात्रा की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की गईं। स्थानीय लोगों ने इन पोस्ट्स के स्क्रीनशॉट प्रशासन तक पहुंचाए, जिसके बाद पांवटा साहिब प्रशासन हरकत में आया।

सूत्रों के मुताबिक एसडीएम ने उप तहसील से फोन पर एक-एक कर्मचारी के अवकाश की पुष्टि की। सामूहिक रूप से कैजुअल लीव पर होने की तस्दीक के बाद सभी को कारण बताओ नोटिस जारी कर तत्काल ड्यूटी जॉइन करने के निर्देश दिए गए। संबंधित कर्मचारियों को एक सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा गया है।

जांच का फोकस अब इस बात पर भी है कि क्या यह यात्रा प्रायोजित थी। यदि किसी बाहरी व्यक्ति या पक्ष द्वारा टूर स्पॉन्सर किए जाने की पुष्टि होती है, तो मामला भ्रष्टाचार के दायरे में जा सकता है। ऐसे में यह भी जांच का विषय होगा कि क्या बदले में राजस्व विभाग से किसी प्रकार का अनुचित लाभ दिया गया।

सूत्रों का कहना है कि खर्चों और संभावित प्रायोजन के एंगल पर भी पूछताछ संभव है। माजरा उप तहसील और पांवटा साहिब तहसील पहले भी दूसरे राज्यों के जीपीए (जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी) से जुड़े मामलों को लेकर विवादों में रहे हैं। जानकार इसे अपनी तरह का अनोखा मामला बता रहे हैं, क्योंकि एक साथ राजस्व अमले के कई अधिकारियों-कर्मचारियों का अवकाश लेकर बाहर जाना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

यह भी उल्लेखनीय है कि पटवारियों का कैडर अब राज्य स्तर का हो चुका है, ऐसे में अंतिम कार्रवाई शिमला स्तर से की जा सकती है। हालांकि फिलहाल जिला प्रशासन जांच रिपोर्ट और नोटिस के जवाब का इंतजार कर रहा है। उपायुक्त ने नायब तहसीलदार को तलब किए जाने की पुष्टि करते हुए कहा कि एसडीएम द्वारा जारी नोटिसों के जवाब के बाद ही अगला कदम उठाया जाएगा।

प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए तो निलंबन से लेकर विभागीय जांच तक की कार्रवाई संभव है। फिलहाल, राजस्व विभाग की कार्यशैली और जवाबदेही पर उठे सवालों ने इस मामले को जिले की सबसे चर्चित प्रशासनिक घटना बना दिया है।

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