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हिमाचल: टोल टैक्स दरों में वृद्धि, भड़के निजी बस ऑपरेटर्स, आंदोलन की चेतावनी

Anil Kashyap
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न्यूज अपडेट्स 
शिमला, 19 फरवरी। टोल टैक्स दरों में हुई वृद्धि को लेकर हिमाचल के निजी बस ऑप्रेटर्ज भड़क गए हैं। टोल टैक्स वृद्धि का हिमाचल प्रदेश निजी बस ऑप्रेटर्ज संघ एवं बस एंड कार ऑप्रेटर्ज कन्फैडरेशन ऑफ इंडिया ने विरोध किया है। वहीं टोल टैक्स वृद्धि के विरोध में निजी बस ऑप्रेटर्ज की संयुक्त चेतावनी भी जारी कि यदि टैक्स वृद्धि कम नहीं की और कॉरिडोर बसों पर एंट्री टैक्स बंद नहीं किया तो ऑप्रेटर्ज सड़कों पर उतर कर आंदोलन करेंगे। 

हिमाचल प्रदेश निजी बस ऑप्रेटर्ज संघ एवं बस एंड कार ऑप्रेटर्ज कन्फैडरेशन ऑफ इंडिया राज्य इकाई ने संयुक्त रूप से विरोध दर्ज करवाया है। संगठनों का कहना है कि 30 से 130 रुपए तक की वृद्धि निजी बस ऑप्रेटर्ज पर असहनीय आर्थिक बोझ डालने वाला निर्णय है। 3 वर्षों में डीजल पर वैट 2 बार बढ़ाए जाने से प्रति लीटर लगभग 6 रुपए की वृद्धि हो चुकी है। इसके अतिरिक्त निजी बस संचालक स्पैशल रोड टैक्स, टोकन टैक्स तथा बस अड्डों पर प्रतिदिन 200 से 500 रुपए तक अड्डा शुल्क अदा कर रहे हैं, ऐसे में टोल टैक्स में भारी वृद्धि निजी परिवहन क्षेत्र को आर्थिक संकट की ओर धकेलने वाला कदम है।

हिमाचल प्रदेश निजी बस ऑप्रेटर्ज संघ के अध्यक्ष राजेश पराशर, रमेश कमल महासचिव व कांगड़ा के अध्यक्ष रवि दत्त शर्मा सहित प्रदेश के सभी जिलाध्यक्षों सहित बस एंड कार ऑप्रेटर्ज कन्फैडरेशन ऑफ इंडिया राज्य इकाई अध्यक्ष, उपाध्यक्ष ओमप्रकाश ठाकुर व अन्य पदाधिकारी महेंद्र मनकोटिया, नसीब सैनी व मनमोहन बेदी ने कहा कि विशेष चिंता का विषय उन बसों से एंट्री टैक्स/टोल वसूली है जो हिमाचल से हिमाचल के बीच संचालित होती हैं, लेकिन कॉरिडोर सुविधा के कारण कुछ किलोमीटर के लिए पड़ोसी राज्यों से होकर पुन: प्रदेश में प्रवेश करती हैं। ऊना, जसूर वाया तलवाड़ा, जसूर/ढांगू वाया पठानकोट, ऊना/संतोषगढ़ वाया अजौली मोड़ तथा ऊना-नयना देवी वाया नंगल जैसे मार्ग प्रदेश की आंतरिक परिवहन व्यवस्था का हिस्सा हैं। इन पर एंट्री टैक्स वसूलना पूर्णतया अन्यायपूर्ण और अव्यवहारिक है।

ऑप्रेटर्ज ने निजी बसों से एंट्री पर टोल टैक्स की वसूली तत्काल प्रभाव से बंद करने की मांग की है। कॉरिडोर परमिट पर चलने वाली बसों को टोल/एंट्री टैक्स से पूर्ण छूट दी जाए। परिवहन नीति निर्धारण में निजी बस ऑप्रेटर्ज से संवाद स्थापित कर व्यावहारिक समाधान निकाला जाए।

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