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शिमला, 14 जनवरी। प्रदेश में बार-बार क्षतिग्रस्त होने वाली सड़कों की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में लोक निर्माण विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने बताया कि सड़क मरम्मत को अधिक टिकाऊ और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से दो आधुनिक तकनीकों—सीमेंट ग्राउटेड बिटुमिनस मैकाडम (सीजीबीएम) और स्टेबलाइज्ड बेस लेयर—को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर अपनाया गया है। इन तकनीकों का प्रारंभिक प्रयोग शोघी–दृमेहली सड़क पर किया जा रहा है।
लोक निर्माण मंत्री ने कहा कि विभाग प्रदेश में लगभग 35 हजार किलोमीटर सड़कों का रखरखाव करता है और सड़क गुणवत्ता सुधार के साथ-साथ हर मौसम में निर्बाध संपर्क सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि खराब मौसम और जलभराव के कारण राज्य की करीब 20 प्रतिशत सड़कें बार-बार क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिससे बार-बार मरम्मत की जरूरत पड़ती है और रखरखाव लागत बढ़ जाती है।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस समस्या के दीर्घकालीन समाधान के लिए नई और टिकाऊ सड़क निर्माण तकनीकों को अपनाया जा रहा है। केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) के साथ विचार-विमर्श के बाद शोघी–दृमेहली सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्सों पर इन तकनीकों से पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है।
उन्होंने कहा कि इन तकनीकों से बनी सड़कें अधिक मजबूत होंगी, भारी यातायात का दबाव सहन कर सकेंगी और जलभराव से होने वाले नुकसान से भी बेहतर तरीके से सुरक्षित रहेंगी। इससे बार-बार मरम्मत की आवश्यकता कम होगी। मंत्री ने उम्मीद जताई कि इन तकनीकों से निर्मित सड़कें करीब 10 वर्षों तक खराब नहीं होंगी, जिससे रखरखाव खर्च में उल्लेखनीय कमी आएगी और आम जनता को सुरक्षित व आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा।
