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शिमला, 10 जनवरी। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी स्वास्थ्य संस्थानों के भवनों में चरणबद्ध तरीके से रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इससे न केवल हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि बिजली खर्च में भी उल्लेखनीय बचत होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने हिमाचल प्रदेश को हरित ऊर्जा राज्य के रूप में विकसित करने का लक्ष्य तय किया है और इसे हासिल करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। वर्तमान में हिमाचल प्रदेश की वार्षिक ऊर्जा खपत लगभग 13 हजार मिलियन यूनिट है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि इस खपत का 90 प्रतिशत से अधिक भाग नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से पूरा किया जाए, ताकि प्रदेश ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने अगले दो वर्षों के भीतर 500 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। वर्तमान में प्रदेश में ऊना जिला स्थित 32 मेगावाट की पेखूबेला, पांच मेगावाट की भंजाल तथा 10 मेगावाट की अघलौर सौर ऊर्जा परियोजनाएं सफलतापूर्वक विद्युत उत्पादन कर रही हैं। इसके साथ ही सरकार सौर ऊर्जा के अलावा ग्रीन हाइड्रोजन, कम्प्रेस्ड बायोगैस और अन्य वैकल्पिक ऊर्जा परियोजनाओं को भी बढ़ावा दे रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल को हरित ऊर्जा राज्य बनाने की दिशा में ग्राम पंचायतों को केंद्रीय भूमिका दी गई है। इसके तहत ‘ग्रीन पंचायत कार्यक्रम’ शुरू किया गया है, जिसमें प्रत्येक पंचायत में 500 किलोवाट क्षमता की ग्राउंड माउंटेड सौर ऊर्जा परियोजना स्थापित की जाएगी। पहले चरण में 24 ग्राम पंचायतों में सौर संयंत्रों को स्वीकृति दी जा चुकी है, जबकि 16 पंचायतों में कार्य आरंभ हो चुका है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत कुल 150 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। परियोजनाओं से प्राप्त राजस्व का 20 प्रतिशत हिस्सा संबंधित पंचायतों के अनाथ बच्चों और विधवाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करने में उपयोग किया जाएगा।
पेखूबेला सौर ऊर्जा परियोजना का वाणिज्यिक संचालन 15 अप्रैल 2024 से शुरू हो चुका है, जिससे अब तक 79.03 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन और 22.91 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया गया है। भंजाल सौर ऊर्जा परियोजना का संचालन 30 नवम्बर 2024 से शुरू हुआ, जिससे 8.57 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन और 3.10 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। वहीं अघलौर सौर ऊर्जा परियोजना में 21 मई 2025 से विद्युत उत्पादन शुरू हो चुका है और अब तक 5.89 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन किया जा चुका है।
इसके अलावा 31 मेगावाट क्षमता की तीन सौर परियोजनाएं निष्पादन चरण में हैं, जबकि 41 मेगावाट क्षमता की चार परियोजनाएं निविदा चरण में हैं। कांगड़ा जिले के डमटाल क्षेत्र में बंजर भूमि पर 200 मेगावाट क्षमता का एक बड़ा सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया जाएगा।
राज्य सरकार द्वारा ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर 250 किलोवाट से पांच मेगावाट तक की सौर ऊर्जा योजनाएं भी आवंटित की जा रही हैं। इन परियोजनाओं से उत्पादित बिजली को हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड खरीदेगा। अब तक 547 निवेशकों को 595.97 मेगावाट क्षमता की ग्राउंड माउंटेड सौर ऊर्जा परियोजनाएं आवंटित की जा चुकी हैं, जिनमें से 403.09 मेगावाट क्षमता के लिए विद्युत खरीद समझौते हो चुके हैं।
हिमऊर्जा द्वारा भी 728.4 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजनाएं हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड को आवंटित की गई हैं, जिनमें से 150.13 मेगावाट क्षमता की 120 माउंटेड सौर ऊर्जा परियोजनाओं पर कार्य शुरू हो चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन प्रयासों से हिमाचल प्रदेश न केवल हरित ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बनेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी सशक्त होगा।
