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हिमाचल : फर्जी प्रमाणपत्र बनाकर ली अस्सिटेंट प्रोफेसर की नौकरी, सुप्रीम कोर्ट ने की सेवाएं रद्द

Anil Kashyap
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न्यूज अपडेट्स 
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी पाने के लिए गलत तरीके से आर्थिक रूप से कमजोर (EWS) प्रमाण पत्र का इस्तेमाल करने वाले शिक्षक को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत प्रभाव से शिक्षक की सेवाएं रद्द करने का आदेश जारी किया है।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति अभय एस. ओझा और न्यायमूर्ति ऑगस्टाइन जॉर्ज की डबल बेंच ने याचिकाकर्ता की अपील को खारिज करते हुए हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। इससे पहले, हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने भी इस मामले में आदेश जारी करते हुए शिक्षक की नियुक्ति रद्द कर दी थी। जिसके बाद शिक्षक ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

हिमाचल हाई कोर्ट का फैसला

बता दें कि हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने 2023 में इस मामले में फैसला सुनाया था कि शिक्षक ने नियुक्ति के लिए जो हलफनामा दाखिल किया था, उसमें झूठा बयान दिया था। हलफनामे के पैराग्राफ-7 में शिक्षक ने दावा किया था कि उसके परिवार का कोई सदस्य नियमित या अनुबंध कर्मचारी नहीं है, जबकि वह खुद एक अनुबंध कर्मचारी था।

फर्जी EWS प्रमाण पत्र का मामला

इससे पहले हिमाचल हाई कोर्ट में यह आरोप लगाया गया था कि शिक्षक ने फर्जी EWS प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया था। विश्वविद्यालय प्रशासन ने 30 दिसंबर 2019 को सहायक प्रोफेसर (लोक प्रशासन) के पद के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसके बाद 8 अप्रैल 2021 को साक्षात्कार लिया गया और 9 अप्रैल 2021 को शिक्षक को नियुक्ति दे दी गई थी।

EWS प्रमाण पत्र के लिए पात्रता पर सवाल

अदालत के समक्ष यह दलील दी गई कि शिक्षक आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) का प्रमाण पत्र प्राप्त करने के पात्र नहीं थे। 4 अक्टूबर 2017 को उनकी नियुक्ति सहकारिता विभाग में इंस्पेक्टर के रूप में हुई थी, जो अनुबंध आधार पर थी। राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जो सरकारी या गैर-सरकारी संस्थान में नियमित या अनुबंध कर्मचारी हो, वह EWS प्रमाण पत्र के लिए पात्र नहीं होता। सुप्रीम कोर्ट ने इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए शिक्षक की नियुक्ति को रद्द कर दिया और उसकी सेवाएं तुरंत प्रभाव से समाप्त कर दीं।

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