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शिमला, 02 सितंबर। हिमाचल प्रदेश में होटल कारोबारियों पर अब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के संशोधित शुल्क ढांचे का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। बोर्ड ने होटलों के संचालन की सहमति यानी कंसेंट टू ऑपरेट (CTO) और स्थापना की सहमति यानी कंसेंट टू एस्टेब्लिश (CTE) के शुल्क में बदलाव किया है। नई दरों के तहत छोटे होटलों के वार्षिक शुल्क में 150 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है।
संशोधित दरों के अनुसार, ग्रीन श्रेणी में आने वाले 10 से 13 कमरों के छोटे होटलों की परियोजना लागत 1.50 करोड़ रुपये तक होने पर वार्षिक शुल्क 14,400 रुपये से बढ़ाकर 36,000 रुपये कर दिया गया है। इस तरह पांच साल का शुल्क पहले 72,000 रुपये था, जो अब बढ़कर 1.80 लाख रुपये हो जाएगा। यानी होटल संचालकों को पांच साल में 1.08 लाख रुपये अतिरिक्त चुकाने होंगे।
वहीं, ऑरेंज श्रेणी के 20 से अधिक कमरों वाले होटलों पर भी शुल्क वृद्धि का असर पड़ेगा। 3 से 5 करोड़ रुपये की अनुमानित परियोजना लागत वाले इन होटलों का संभावित वार्षिक शुल्क 60,000 से 1 लाख रुपये तक हो सकता है। इसके अनुसार पांच साल का संभावित शुल्क 3 से 5 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। शुल्क का निर्धारण परियोजना लागत के आधार पर मल्टीप्लायर एस्केलेशन के तहत किया जाएगा।
संशोधित शुल्क ढांचे का असर केवल नए होटलों पर ही नहीं, बल्कि पहले से संचालित होटलों पर भी पड़ेगा। पुरानी दरों पर शुल्क जमा करने वाले होटल संचालकों को अब नई दरों के अनुसार भुगतान करना होगा। शुल्क जमा नहीं करने वाले कुछ होटल संचालकों को बोर्ड की ओर से होटल बंद करने के नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इससे छोटे और मध्यम स्तर के होटल कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है।
फेडरेशन ऑफ हिमाचल होटल्स एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन्स के चेयरमैन देवेंद्र वर्मा ने प्रदेश सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उनका कहना है कि छोटे पर्यटन प्रतिष्ठानों की तुलना बड़े औद्योगिक विनिर्माण संस्थानों से करना उचित नहीं है। बढ़े हुए शुल्क से सीमित संसाधनों में कारोबार चला रहे छोटे होटल संचालकों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ेगा।
मुख्य आंकड़े एक नजर में:
- छोटे होटल का वार्षिक शुल्क: ₹14,400 से ₹36,000
- पांच साल का शुल्क: ₹72,000 से ₹1,80,000
- अतिरिक्त बोझ: ₹1,08,000
- शुल्क में बढ़ोतरी: 150%
- ऑरेंज श्रेणी के होटलों का संभावित पांच साल का शुल्क: ₹3 लाख से ₹5 लाख
