न्यूज अपडेट्स
शिमला, 31 अक्टूबर। हिमाचल प्रदेश सरकार ने माल एवं सेवा कर (GST) कानून में संशोधन किया है। राज्यपाल की ओर से 26 अक्टूबर 2026 को मंजूरी मिलने के बाद हिमाचल प्रदेश माल एवं सेवा कर (संशोधन) अधिनियम, 2026 को राजपत्र में प्रकाशित कर दिया गया है। इस संशोधन से प्रदेश के कारोबारियों को आपूर्ति के बाद मिलने वाली छूट और रिफंड से जुड़े मामलों में राहत मिलने का रास्ता साफ हुआ है।
संशोधन के तहत हिमाचल प्रदेश माल एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 15, 34 और 54 में बदलाव किए गए हैं। धारा 15 में किए गए संशोधन के अनुसार, किसी वस्तु या सेवा की आपूर्ति पूरी होने के बाद भी निर्धारित शर्तें पूरी होने पर संबंधित कारोबारी को छूट दी जा सकेगी।
इसके लिए आपूर्तिकर्ता को क्रेडिट नोट जारी करना होगा। वहीं, जिस खरीदार को छूट दी जाएगी, उसे छूट के अनुपात में पहले प्राप्त इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) वापस करना होगा। यह प्रक्रिया अधिनियम की धारा 34 के प्रावधानों के अनुसार पूरी की जाएगी।
आपूर्ति के बाद भी जारी हो सकेंगे क्रेडिट नोट
धारा 34 में किए गए संशोधन के तहत आपूर्ति पूरी होने के बाद दी जाने वाली छूट के मामलों में भी क्रेडिट नोट जारी करने का प्रावधान शामिल किया गया है। इससे निर्धारित शर्तों के तहत आपूर्तिकर्ताओं को बाद में दी गई छूट का हिसाब GST व्यवस्था में समायोजित करने की सुविधा मिलेगी।
रिफंड के दायरे में अप्रयुक्त ITC भी शामिल
अधिनियम की धारा 54 में संशोधन कर रिफंड से जुड़े प्रावधानों का दायरा बढ़ाया गया है। इसके तहत निर्धारित शर्तों के अनुसार अप्रयुक्त इनपुट टैक्स क्रेडिट के रिफंड को भी शामिल किया गया है। वहीं, भारत से कर का भुगतान करके निर्यात किए गए सामान के रिफंड दावों को धारा 54 की उपधारा (14) में किए गए बदलाव के तहत अलग रखा गया है।
अधिसूचना के बाद लागू होंगे प्रावधान
संशोधन अधिनियम में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इसके प्रावधान उसी तारीख से लागू होंगे, जिसे राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना जारी करके निर्धारित करेगी। यानी राज्यपाल की मंजूरी और राजपत्र में प्रकाशन के बाद भी कानून के संशोधित प्रावधानों के लागू होने की तारीख अलग से अधिसूचित की जाएगी
