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शिमला, 07 नवंबर। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बिलासपुर जिले में नौणी से शुरू होने वाले फोरलेन पर बिना वैध परमिट बसें चलाने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। न्यायाधीश संदीप शर्मा ने कहा कि किसी भी निजी या सरकारी बस को वैध परमिट के बिना फोरलेन पर चलने की अनुमति नहीं होगी। यह आदेश एचआरटीसी, पंजाब, हरियाणा रोडवेज व चंडीगढ़ की बसों पर भी लागू होगा। जिन बसों के परमिट स्वारघाट और पुराने रूट के लिए हैं, उन्हें निर्धारित रास्ते से ही चलना होगा।
अदालत ने आरटीओ बिलासपुर को निर्देश दिए कि फोरलेन पर बसें चलाने के लिए रूट परिवर्तन के संबंध में याचिकाकर्ताओं की ओर से दिए गए आवेदनों पर सभी पक्षों को सुनने के बाद चार सप्ताह में फैसला लें। अदालत ने तारा देवी, रंजीत सिंह और अन्य निजी बस ऑपरेटरों की याचिकाओं का निपटारा करते हुए ये आदेश जारी किए।
याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण ने 8 अक्टूबर को आदेश जारी कर उन्हें फोरलेन के इस्तेमाल से रोक दिया था, जबकि एचआरटीसी, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ की बसों को बिना परमिट वहां चलने की छूट दी जा रही थी।
रूट परमिट के अनुसार बसों को स्वारघाट, कल्लर और पंजपीरी के पुराने रास्ते से जाना अनिवार्य था। वहीं, राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि नवंबर 2024 से बस ऑपरेटर बिना परमिट फोरलेन का इस्तेमाल कर रहे थे।
