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शिमला, 16 अक्टूबर। ऑनलाइन लाइव स्ट्रीमिंग ऐप के माध्यम से पैसे कमाने की कोशिश कुछ युवतियों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। लाइव स्ट्रीमिंग के दौरान साझा किए गए निजी वीडियो कथित तौर पर उनकी अनुमति के बिना रिकॉर्ड कर अश्लील वेबसाइट्स पर अपलोड किए जा रहे हैं। ऐसे मामले सामने आने के बाद साइबर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
शिमला साइबर क्राइम सेल के पास पिछले दो माह के दौरान इस तरह की पांच शिकायतें पहुंची हैं। पुलिस इन मामलों की जांच कर रही है और संबंधित वेबसाइट से वीडियो हटवाने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। जानकारी के अनुसार साइबर सेल शिमला के पास शिकायत लेकर पहुंचीं युवतियों ने आरोप लगाया है कि उनके वीडियो उनकी अनुमति के बिना रिकॉर्ड किए गए और बाद में अलग-अलग वेबसाइट पर अपलोड कर दिए गए। पीडि़ताओं को इसकी जानकारी तब मिली, जब उनके निजी वीडियो इंटरनेट पर प्रसारित होने लगे। इससे उनकी निजता और सामाजिक प्रतिष्ठा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। पुलिस अब शिकायतों के आधार पर वीडियो अपलोड करने वाले लोगों और संबंधित डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका की जांच कर रही है।
शिकायतों में एक पीडि़ता ने बताया कि वह पैसे कमाने के उद्देश्य से लाइव स्ट्रीमिंग ऐप से जुड़ी थी। इस माध्यम से उसने करीब तीन से चार लाख रुपए कमाए। हालांकि बाद में उसे पता चला कि लाइव स्ट्रीमिंग के दौरान साझा किए गए उसके वीडियो को कुछ आपत्तिजनक वेबसाइट्स पर अपलोड कर दिया गया है। इसके बाद पीडि़ता ने शिकायत दर्ज करवाई। मामले में हेल्पलाइन नंबर-1930 पर भी शिकायत दी गई है। पुलिस अब वीडियो हटवाने के साथ-साथ यह पता लगाने में जुटी है कि संबंधित सामग्री किन वेबसाइट्स पर अपलोड की गई और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।
कुछ माह पहले शिमला जिला के चौपाल क्षेत्र की एक युवती का वीडियो वायरल होने का मामला भी सामने आया था। उस समय युवती ने पुलिस को शिकायत देकर आरोप लगाया था कि वीडियो एआई की मदद से तैयार किया गया है। इस तरह के मामलों ने इंटरनेट पर किसी व्यक्ति की तस्वीर या वीडियो का दुरुपयोग किए जाने को लेकर भी चिंता बढ़ाई है। शिमला के रिज मैदान और मालरोड सहित अन्य स्थानों पर दो युवतियों द्वारा आपत्तिजनक वीडियो शूट कर वेबसाइट्स पर अपलोड किए जाने का मामला भी पुलिस की जांच के दायरे में है। पुलिस इन मामलों से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही है। ऐसे मामलों में सामाजिक बदनामी और निजी जानकारी सार्वजनिक होने के डर से कई पीडि़ताएं पुलिस तक पहुंचने से बचती हैं। यही वजह है कि सामने आने वाली शिकायतों की संख्या वास्तविक घटनाओं से कम हो सकती है।
किसी की अनुमति के बिना निजी वीडियो को रिकॉर्ड करना, साझा करना या अश्लील वेबसाइट्स पर अपलोड करना गंभीर मामला है। ऐसे मामलों में पीडि़ताओं को चुप रहने के बजाय साइबर पुलिस से संपर्क करने और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की जरूरत है। एसपी साइबर क्राइम अमित यादव के अनुसार पुलिस के पास आए मामलों की जांच की जा रही है। साइबर क्राइम सेल संबंधित वेबसाइट्स ं से आपत्तिजनक वीडियो हटाने की प्रक्रिया में जुटा है। जांच के दौरान शिकायतों में सामने आए तथ्यों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
