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बिलासपुर, 17 अक्टूबर। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले से मानवता और निस्वार्थ सेवा की एक अद्भुत मिसाल सामने आई है। कोटधार क्षेत्र की जेजवीं पंचायत के निवासी सुखराम सहगल पुत्र ज्योति राम सहगल ने अपनी मृत्यु के उपरांत अपनी देह अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान बिलासपुर को दान करने का संकल्प लिया है। स्वास्थ्य विभाग से चीफ फार्मासिस्ट के पद से सेवानिवृत्त सुखराम सहगल के इस फैसले ने समाज के सामने एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।
सुखराम सहगल का परिवार भी उच्च शिक्षित है। उनके एक पुत्र पेशे से शिक्षक हैं, जबकि दूसरे पुत्र प्रबंधक (मैनेजर) के पद पर कार्यरत हैं। चिकित्सा क्षेत्र व विज्ञान के प्रति उनके परिवार का जुड़ाव इसी बात से झलकता है कि उनकी पोती इशिता वर्तमान में राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल चंडीगढ़ में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है।
क्षेत्र में एक स्वच्छ छवि और मिलनसार व्यक्तित्व वाले सुखराम सहगल अध्यात्म से भी गहरे जुड़े हुए हैं। देहदान के इस बड़े फैसले पर उनका मानना है कि दुनिया छोड़ने के बाद यदि यह नश्वर शरीर किसी के काम आ जाए और चिकित्सा विज्ञान के छात्रों के शोध में सहायक बने, तो इससे बेहतर बात और क्या हो सकती है। उन्होंने आम लोगों से भी अपील की है कि वे रूढ़ियों को तोड़कर इस नेक राह पर चलें और मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा करने का संकल्प लें।
उनके इस महान और निस्वार्थ संकल्प को सम्मान देने के लिए बीते रोज एम्स बिलासपुर प्रशासन के एनाटॉमी विभाग द्वारा 'कृतज्ञता देहदानी वंदन समारोह' का आयोजन किया गया था। इस विशेष समारोह में सुखराम सहगल को आमंत्रित कर उन्हें सम्मानित किया गया। एम्स प्रबंधन ने चिकित्सा विज्ञान और भावी डॉक्टरों की पढ़ाई के लिए उनके इस योगदान के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की।
