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शिमला, 03 अगस्त। हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य की प्राकृतिक सुंदरता, पर्यावरण और जैव विविधता को बचाने तथा भविष्य में आपदाओं के जोखिम को कम करने के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है।
सुक्खू कैबिनेट की हालिया बैठक में राजधानी शिमला के भीड़भाड़ वाले कोर एरिया (संजौली, आईजीएमसी, लक्कड़ बाजार, रिज, मॉल रोड, ओकओवर, छोटा शिमला आदि) में नए निर्माण पर पूरी तरह से रोक लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। हालांकि, इस प्रतिबंध के बीच केवल सार्वजनिक उपयोग के सरकारी भवनों और पुराने भवनों के उनके 'ओल्ड लाइन्स' (पुराने स्वरूप) के आधार पर ही पुनर्निर्माण की छूट होगी।
2023 की विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं से सबक लेते हुए सरकार अब राज्य के हर शहर और ग्रामीण क्षेत्र में दूरगामी नीतियां लागू करने जा रही है। नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी के अनुसार, टीसीपी विभाग जल्द ही इस संबंध में अधिसूचना जारी कर जनता से आपत्तियां और सुझाव मांगेगा। इसके अलावा, पूरे प्रदेश की हर पंचायत में भूस्खलन संभावित, संवेदनशील ढलानों और जल स्रोतों के आसपास के क्षेत्रों को चिन्हित कर 'नो-कंस्ट्रक्शन ज़ोन' बनाने का एजेंडा तैयार किया जा रहा है।
प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए सरकार प्रत्येक शहर में 'अर्बन फॉरेस्ट' विकसित करेगी और सड़कों (MDR व ग्रामीण मार्ग) के किनारे निर्माण के लिए सुरक्षा मानक व न्यूनतम दूरी तय करेगी। प्रभावित भूमि मालिकों के लिए सरकार सर्किल रेट के अनुसार ज़मीन खरीदने का विकल्प भी रखेगी। शिमला की 26 ग्रीन बेल्ट्स की सुरक्षा को और मजबूत करते हुए सरकार का स्पष्ट संदेश है—हिमाचल को देवदार की हरित विरासत से पहचाना जाना चाहिए, कंक्रीट के जंगल से नहीं।
