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शिमला, 21 अगस्त। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के बेड़े में शामिल हुई और हो रही नई इलेक्ट्रिक टाइप-वन बसों का 12 साल तक ओलेक्ट्रा बस कंपनी ही रखरखाव और मरम्मत करेगी। कंपनी के साथ किए जा रहे एनुअल कंसोलिडेटेड मेंटेनेंस कॉन्ट्रेक्ट (एएमसी) में यह शर्त रहेगी। 1.26 करोड़ रुपये खर्च कर खरीदी गई बसों के रूट पर चलाए जाने के बाद एचआरटीसी हर बस के लिए 5.31 रुपये से लेकर 18 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से कंपनी को भुगतान करेगा।
कंपनी के साथ 12 साल तक बसों के रखरखाव की जिम्मेदारी तय होगी। एचआरटीसी प्रबंधन और कंपनी के बीच अनुबंध साइन होने पर तय शर्तें लागू हो जाएंगी। टायर और कलपुर्जे उपलब्ध करवाने और मरम्मत का कार्य कंपनी का स्टाफ ही करेगा।
नई 297 इलेक्ट्रिक बसों के 12 साल तक मरम्मत और रखरखाव का कोई झंझट नहीं रहेगा। इसके बदले निगम को हर बस के लिए रोजाना न्यूनतम 120 किलोमीटर के संचालन पर 5.31 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से कंपनी को भुगतान करना होगा, जो 12 साल पूरे होने तक बढ़कर 18 रुपये तक पहुंच जाएगा। हर साल इसमें वृद्धि होती रहेगी। बसों के रूट के बीच में ब्रेकडाउन होने की स्थिति में कंपनी पर जुर्माना लगाने का भी प्रावधान रहेगा।
रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी कंपनी को सौंपे जाने की इस नई व्यवस्था से एचआरटीसी को अपनी वर्कशॉप में बसों की मरम्मत करवाने, कलपुर्जे और टायर खरीदने के साथ ही नए स्टाफ की भर्ती करने जैसी दिक्कतों से निजात मिलेगी। एचआरटीसी के डीएम टेक्निकल पवन शर्मा ने कहा कि कंपनी के साथ एनुअल कंसोलिडेटेड मेंटेनेंस दस्तावेज जल्द ही साइन हो जाएंगे। इसके बाद ही मेंटेनेंस की एवज में तय प्रति किलोमीटर की दर से निगम भुगतान करना शुरू करेगा। बसों के रूट पर संचालित किए जाने के बाद ही किलोमीटर के अनुसार यह राशि अदा की जाएगी।
नई बसों में किसी भी प्रकार की तकनीकी खराबी आने पर उसकी मरम्मत कंपनी ही करवाएगी। तकनीकी खराबी से हुए हादसे में होने वाले नुकसान की भरपाई भी कंपनी को ही करनी होगी। वहीं चालक की लापरवाही, गलती या प्रदेश की सड़कों की खराब हालत के कारण बस को कोई नुकसान पहुंचता है तो उसके लिए चालक और एचआरटीसी ही जिम्मेदार होंगे। ऐसी स्थिति में मरम्मत का खर्च एचआरटीसी को ही वहन करना होगा।
सड़क की स्थिति देखकर तय होंगे रूट
हिमाचल पथ परिवहन निगम प्रबंधन ने सभी डिपो के क्षेत्रीय प्रबंधकों को निर्देश दिए हैं कि बसों के लिए रूट तय करने से पहले जिम्मेदार अधिकारी स्वयं दौरा कर यह सुनिश्चित करें कि बस को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे। तंग सड़कों या खस्ताहाल रास्तों से बसों को होने वाले नुकसान के लिए कंपनी जिम्मेदार नहीं होगी। कंपनी केवल बसों की तकनीकी दिक्कतों या खराबी की ही जिम्मेदारी लेगी।
