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शिमला, 15 अगस्त। हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग में जाति आधारित उत्पीड़न के गंभीर आरोपों के बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) पूरी तरह सख्त मोड़ में आ गया है। मामला शिमला से सामने आया है, जहां DSP विजय कुमार रघुवंशी ने अपने साथ हुए भेदभाव और जातीय उत्पीड़न को लेकर आयोग में गुहार लगाई थी।
इस शिकायत पर बड़ी कार्रवाई करते हुए NCSC ने राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) आर. डी. नजीम और पुलिस महानिदेशक (DGP) अशोक तिवारी को 20 अगस्त को नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का समन भेजा है। आयोग के सदस्य पार्थ बिस्वास इस संवेदनशील मामले की सुनवाई करेंगे।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब DSP विजय कुमार रघुवंशी का आधिकारिक सरकारी वाहन अचानक वापस ले लिया गया। DSP का आरोप है कि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को लिफ्ट देने के बाद उनके खिलाफ यह दंडात्मक कार्रवाई की गई, जो सीधे तौर पर उनकी जाति से जुड़ा मानसिक और प्रशासनिक उत्पीड़न है।
इस बाबत 3 जून को दी गई शिकायत पर आयोग ने पहले 30 जून को नोटिस भेजकर 15 दिनों में रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन असंतोषजनक कार्रवाई के चलते अब आला अधिकारियों को तमाम दस्तावेजों, प्रासंगिक रिकॉर्ड्स और एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) के साथ दिल्ली में हाजिर होने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता DSP को भी मौजूद रहने के लिए कहा जा सकता है।
