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शिमला, 08 जुलाई। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग और फोरलेन निर्माण से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट के आदेशों की समय पर तामील न करने वाली एक निर्माण कंपनी पर 1,00,000 रुपए की कॉस्ट (जुर्माना) लगाई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसका मुख्य उद्देश्य काम को जल्द पूरा करवाना था, ताकि आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
कंपनी ने कोर्ट को दी गई अंडरटेकिंग का उल्लंघन किया था, जिस पर अदालत ने उसे अवमानना का दोषी पाया था। कंपनी ने अपनी अर्जी में बताया कि बदले हुए प्रोजैक्ट स्कोप के तहत जुलाई 2025 में काम पूरा कर लिया गया है। चूंकि काम पूरा हो चुका है, इसलिए कोर्ट ने अवमानना की कार्यवाही बंद कर दी है। हालांकि, लापरवाही के लिए कंपनी को एक महीने के भीतर 1,00,000 की राशि 'हाईकोर्ट इम्प्लाइज वैल्फेयर एसोसिएशन फंड' में जमा करने का आदेश दिया गया है।
लोक निर्माण विभाग मंडी के अधीक्षण अभियंता ने हलफनामा देकर बताया कि दियोद के पास क्षतिग्रस्त हुई 200 मीटर सड़क को बहाल कर दिया गया है। इसके साथ ही 10 रिटेनिंग और ब्रेस्ट वॉल (दीवारें) व पैचवर्क का काम भी 100 प्रतिशत पूरा हो चुका है। इस पूरे बहाली कार्य के लिए 5,51,13,973 रुपए स्वीकृत किए गए थे, जिसमें से 50 प्रतिशत राशि जारी हो चुकी है।
हाईकोर्ट ने एनएचएआई को आदेश दिया है कि वह बची हुई राशि भी जल्द से जल्द जारी करे। इस मामले की अगली सुनवाई अब 28 जुलाई 2026 को नियमित मुख्य खंडपीठ के समक्ष होगी।
