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कुल्लू, 15 जून। (अनिल) हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) के कुल्लू डिपो में कथित भ्रष्टाचार और मनमानी के आरोपों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में चालकों ने कुल्लू डिपो के DDM और मनाली के अड्डा प्रभारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि वीडियो सामने आने के बाद भी विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या कार्रवाई सामने नहीं आई है, जिससे पूरे मामले को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
वायरल वीडियो के अनुसार कुछ चालकों ने आरोप लगाया है कि उनकी ड्यूटी रोहतांग पास के लिए लगाई गई थी, लेकिन रास्ते में दुकान नंबर 173 पर बसों को रोका जाता है। चालकों का कहना है कि इस संबंध में कोई लिखित आदेश मौजूद नहीं है, जिससे अधिकारियों और संबंधित दुकानदार के बीच कथित मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।
वीडियो में चालकों ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ चुनिंदा कर्मचारियों को लगातार रोहतांग रूट पर भेजा जाता है, जबकि अन्य कर्मचारियों के साथ भेदभाव किया जाता है। एक चालक के अनुसार मनाली के अड्डा प्रभारी द्वारा उनसे 500-500 रुपये लिए गए थे, हालांकि उन्हें यह नहीं बताया गया कि यह राशि किस उद्देश्य से ली गई। बाद में विरोध करने पर उन्हें मनाली से कुल्लू भेज दिया गया।
चालकों का आरोप है कि जब उन्होंने इस मामले को लेकर DDM कुल्लू से मुलाकात की तो उन्हें कथित तौर पर कहा गया कि "पैसा देना पड़ेगा, तभी काम होंगे।" वीडियो में यह भी दावा किया गया है कि रोहतांग ड्यूटी के लिए पैसे लेकर तैनाती की जाती है और जो कर्मचारी पैसा देता है, उसे ही इस रूट पर भेजा जाता है।
एक चालक ने आरोप लगाया कि दुकान नंबर 173 के संचालक द्वारा उन्हें यह तक कहा गया कि यदि रोहतांग में अधिक ठंड लगती है तो उनके लिए बंजार के आदेश करवा दिए जाएंगे। चालक ने सवाल उठाते हुए कहा कि किसी निजी व्यक्ति को कर्मचारियों की ड्यूटी और आदेशों में दखल देने का अधिकार कैसे दिया जा सकता है।
इसके अलावा एक अन्य वायरल वीडियो में आरोप लगाया गया है कि मनाली स्थित रेस्ट रूम को अड्डा प्रभारी ने कथित तौर पर निजी कमरे के रूप में इस्तेमाल कर रखा है और केवल दो लोगों को ही वहां रहने की अनुमति दी जाती है। वीडियो में एक चालक ने दावा किया कि जब उसने रेस्ट रूम का दरवाजा खोलने की कोशिश की तो अंदर मौजूद दो लोगों ने उसके साथ धक्का-मुक्की और गाली-गलौज की, जिससे उसके हाथ में चोट लग गई। इसके बाद उसके खिलाफ विभिन्न प्रकार के बयान दर्ज करवाए गए।
चालकों ने यह भी आरोप लगाया है कि जब उन्होंने अपनी शिकायत DDM कुल्लू के समक्ष रखी तो उन्हें पूरी वर्कशॉप के सामने अपमानित किया गया। वहीं अड्डा प्रभारी द्वारा कथित रूप से यह कहा गया कि जेसीबी लगाने में निजी पैसे खर्च किए गए हैं।
गौरतलब है कि इन सभी आरोपों के बावजूद HRTC प्रबंधन या संबंधित अधिकारियों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में यदि आरोप सही हैं तो उच्च अधिकारियों द्वारा कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है और यदि आरोप निराधार हैं तो विभाग की ओर से स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की जा रही है। साथ ही यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों का एक ही डिपो में कई वर्षों तक बने रहना भी सवालों के घेरे में है।
