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हिमाचल डेस्क। चंडीगढ़ के सेक्टर 11 स्थित कुमार मेडिकल स्टोर के कैशियर जानकी दास की सनसनीखेज हत्या के मामले में एक और बड़ा मोड़ आ गया है। जम्मू-कश्मीर से गिरफ्तार कर चंडीगढ़ लाए जा रहे दो मुख्य आरोपियों ने पुलिस हिरासत से भागने का प्रयास किया, जिसके बाद हुई मुठभेड़ में पुलिस ने दोनों के पैरों पर गोलियां मारकर उन्हें दोबारा दबोच लिया। यह घटनाक्रम चंडीगढ़ के धनास इलाके के पास उस वक्त हुआ जब पुलिस की गाड़ी अचानक दुर्घटनाग्रस्त हो गई। घायल आरोपियों को तुरंत इलाज के लिए पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया है।
जानकारी के मुकाबिर, पुलिस टीम दोनों आरोपियों को जम्मू के राजौरी से पकड़कर सरकारी वाहन से चंडीगढ़ ला रही थी। धनास के पास अचानक चालक पुलिसकर्मी की आंख लग गई (नींद की झपकी आ गई), जिससे गाड़ी अनियंत्रित होकर सड़क किनारे एक पेड़ से जा टकराई। गाड़ी के टकराते ही पीछे बैठे दोनों शूटरों ने स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश की। जब एक कांस्टेबल ने उन्हें पकड़ना चाहा, तो आरोपियों ने पुलिसकर्मी की पिस्तौल छीन ली और भागने लगे। भागते समय एक शूटर ने इंस्पेक्टर सिखों पर फायर करदिया, जिसमें वे बाल-बाल बच गए।
वहीं, आत्मरक्षार्थ और आरोपियों को रोकने के लिए इंस्पेक्टर ने जवाबी फायरिंग की। पुलिस की ओर से चलाई गई गोलियां दोनों शूटरों की टांगों पर लगीं, जिससे वे वहीं ढेर हो गए और पुलिस ने उन्हें दोबारा कस्टडी में ले लिया। इससे पहले, बुधवार को चंडीगढ़ पुलिस की ऑपरेशन सेल और क्राइम ब्रांच ने जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ मिलकर एक संयुक्त अभियान चलाया था। पुलिस इनपुट्स के आधार पर दोनों आरोपियों— सनी और आर्यन को राजौरी के घने जंगली इलाके से घेराबंदी करके गिरफ्तार किया गया था। पुलिस की प्रारंभिक तफ्तीश में सामने आया है कि जो तीसरा आरोपी अभी फरार चल रहा है, असल में उसी ने कैशियर जानकी दास पर गोलियां दागी थीं। फरार आरोपी का ट्राईसिटी (चंडीगढ़-पंचकूला-मोहाली) में गहरा नेटवर्क है और उसने वारदात से पहले इलाके की पूरी रेकी की थी।
इस एनकाउंटर के बाद अस्पताल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। दोपहर 12 बजे होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में चंडीगढ़ पुलिस के आला अधिकारी मामले की जानकारी देंगे।
