न्यूज अपडेट्स
हमीरपुर, 18 जून। अंतर्राष्ट्रीय जलक्षेत्र (होर्मुज) में अमेरिकी मिसाइल हमले का शिकार हुए हिमाचल प्रदेश के 23 वर्षीय होनहार मर्चेंट नेवी अफसर आदित्य शर्मा का पार्थिव शरीर उनके पैतृक जिले हमीरपुर पहुंच गया है। इकलौते जवान बेटे का जैसे ही अस्पताल पहुंचा, परिजनों की चीख-पुकार से पूरा माहौल गमगीन हो गया। इस दुखद घड़ी में परिवार गहरे सदमे में है, लेकिन उनके अंदर अमेरिका के खिलाफ भारी आक्रोश भी उबल रहा है।
"अमेरिका चाहता तो बच सकती थी मेरे भतीजे की जान"
आदित्य के चाचा संजीव कुमार ने इस दर्दनाक मौत के लिए सीधे तौर पर अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। पंजाब केसरी से विशेष बातचीत में अपना गुस्सा जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा किसी कमर्शियल (व्यापारिक) शिप पर मिसाइल दागना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और क्रूर है। अगर अमेरिका चाहता तो शिप को रोककर (डिटेन कर) नियमानुसार कानूनी कार्रवाई कर सकता था। ऐसा करने से मेरे भतीजे की जान बच जाती।
हमले के 8वें दिन आदित्य की पार्थिव देह को भारत (चंडीगढ़) लाया गया। कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बुधवार रात करीब 8 बजे शव को हमीरपुर मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया। बता दें कि परिजनों ने ओमान में शव का पोस्टमार्टम करवाने से साफ इन्कार कर दिया था। वीरवार सुबह एसडीएम नादौन निशांत कुमार की देखरेख में करीब 11 बजे हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई, जिसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
स्कॉटलैंड से की थी पढ़ाई, 23 की उम्र में टूट गए सारे सपने
हमीरपुर जिले के गलोड़ क्षेत्र (ग्राम पंचायत हड़ेटा, गांव भालू) के रहने वाले आदित्य शर्मा अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। उनके पिता पंजाब के जालंधर में व्यवसाय करते हैं। आदित्य ने 12वीं तक की पढ़ाई जालंधर से ही पूरी की थी। बचपन से ही समंदर की लहरों पर राज करने का सपना देखने वाले आदित्य ने स्कॉटलैंड से नॉटिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की थी। इसके बाद 24 नवंबर को उन्हें मर्चेंट नेवी में नौकरी मिली और वह तेल टैंकर MT सेत्तेबेल्लो पर डैक कैडेट के पद पर तैनात थे। लेकिन बीते बुधवार होर्मुज में हुए अमेरिकी हमले ने इस होनहार युवा के सारे सपने पल भर में खाक कर दिए।
परिवार ने सरकार और दूतावास का जताया आभार
दुख की इस घड़ी में आदित्य के चाचा संजीव कुमार ने स्थानीय प्रशासन, भारत सरकार और इंडियन एंबेसी (भारतीय दूतावास) का विशेष आभार व्यक्त किया है, जिनकी त्वरित मदद के कारण 8वें दिन आदित्य की पार्थिव देह उनके वतन और परिवार तक पहुंच सकी।
