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शिमला, 07 जून। हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) के चालक रविंदर सिंह को सोशल मीडिया पर सरकार और निगम की नीतियों की आलोचना करने के मामले में दी गई बर्खास्तगी की सजा में बड़ी राहत मिली है। HRTC के प्रबंध निदेशक डॉ. निपुण जिंदल ने विभागीय रिकॉर्ड और मामले की पूरी समीक्षा के बाद चालक की बर्खास्तगी को अत्यधिक मानते हुए सजा में संशोधन कर दिया है और चालक रविंदर सिंह की नौकरी बहाल कर दी है।
मामला वर्ष 2024 का है, जब रविंदर सिंह, जो उस समय HRTC रामपुर यूनिट में चालक के पद पर कार्यरत थे, पर फेसबुक के माध्यम से सरकारी नीतियों की आलोचना करने तथा HRTC के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करने के आरोप लगे थे। विभागीय जांच में आरोपों को सही पाया गया, जिसके बाद 16 अक्टूबर 2024 को उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। बाद में उनकी अपील भी HRTC हमीरपुर मंडल के मंडलीय प्रबंधक द्वारा खारिज कर दी गई थी।
इसके बाद चालक ने मामले को HRTC मुख्यालय में चुनौती दी और साथ ही उच्च न्यायालय का भी दरवाजा खटखटाया। उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद प्रबंध निदेशक ने मामले की दोबारा सुनवाई की।
सुनवाई और विभागीय रिकॉर्ड के अवलोकन के बाद प्रबंध निदेशक ने माना कि चालक ने HRTC की सोशल मीडिया नीति का उल्लंघन किया है, लेकिन यह मामला वित्तीय अनियमितता, भ्रष्टाचार अथवा निगम को प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान पहुंचाने जैसी गंभीर श्रेणी का नहीं है। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि चालक का पूर्व सेवा रिकॉर्ड संतोषजनक रहा है और उसके खिलाफ केवल एक लापरवाही से वाहन चलाने का मामला दर्ज था।
इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखते हुए प्रबंध निदेशक ने बर्खास्तगी की सजा को अनुपातहीन माना और उसे संशोधित करते हुए चालक के वेतन में चार चरणों की कटौती (क्यूम्यूलेटिव प्रभाव सहित) की सजा दी है। साथ ही निलंबन अवधि के लिए केवल निर्वाह भत्ता (Subsistence Allowance) देने का निर्णय लिया गया है।
नौकरी बहाल होने के बाद चालक रविंदर सिंह ने प्रबंध निदेशक HRTC और माननीय उच्च न्यायालय का धन्यवाद किया और उन्होंने कहा भ्रष्टाचारियों को कड़ी चेतावनी देकर छोड़ने वाले अधिकारियों ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक ईमानदार ड्राइवर को कर्मचारी मृत्यु दंड दे दिया था।
प्रबंध निदेशक ने भविष्य में सोशल मीडिया पर सरकार या HRTC की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी गतिविधि से दूर रहने की सख्त चेतावनी भी दी है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृत्ति होने पर नियमों के तहत और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
