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हिमाचल: HRTC की लंबित TMPA भर्ती को लेकर हाईकोर्ट का कड़ा रुख, दो सप्ताह के बीच नियुक्ति के निर्देश

Anil Kashyap
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न्यूज अपडेट्स 
शिमला, 27 मई। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की वर्ष 2017 की लंबित भर्ती प्रक्रिया को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने परिवहन निगम को निर्देश दिए हैं कि ‘परिवहन बहुउद्देशीय सहायक’ (टीएमपीए) के पदों पर पात्र याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति दो सप्ताह के भीतर सुनिश्चित की जाए। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि उसके आदेश को एचआरटीसी के निदेशक मंडल के सामने मंजूरी के लिए भेजना पूरी तरह अनावश्यक है।

न्यायाधीश रोमेश वर्मा ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत पहले ही इस केस में गुण-दोष के आधार पर फैसला दे चुकी है। इसके बावजूद निगम का यह कहना कि मामले को निदेशक मंडल की बैठक में रखा जाएगा, हैरान करने वाला है। कोर्ट ने कहा कि यदि दो सप्ताह के भीतर आदेशों का पालन नहीं हुआ तो एचआरटीसी के निदेशक को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना होगा।

मामला वर्ष 2017 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। एचआरटीसी ने 3 अगस्त 2017 को विज्ञापन जारी कर ‘परिवहन बहुउद्देशीय सहायक’ के 1300 पद भरने की प्रक्रिया शुरू की थी। बाद में सितंबर 2017 में शुद्धिपत्र भी जारी किया गया। भर्ती प्रक्रिया के तहत उम्मीदवारों ने 17 सितंबर 2017 को लिखित परीक्षा दी और परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों के इंटरव्यू और मूल्यांकन अक्टूबर और नवंबर 2017 में किए गए।

हालांकि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद निगम ने लंबे समय तक परिणाम घोषित नहीं किए। बाद में ट्रिब्यूनल के निर्देशों के बाद 10 मई 2018 को 1235 पदों के लिए अंतिम परिणाम जारी किया गया। इसके बाद मामला फिर अदालत पहुंचा।

हाईकोर्ट के 20 अगस्त 2024 के आदेशों के बाद 28 अप्रैल 2025 को गठित समिति ने आरक्षण रोस्टर की दोबारा जांच की और संशोधित मेरिट सूची तैयार की। जांच में पता चला कि आरक्षित वर्ग के 91 उम्मीदवारों को गलती से मूल मेरिट सूची में शामिल कर लिया गया था। इन्हें हटाकर उनकी जगह 91 नए उम्मीदवारों को शामिल करना जरूरी पाया गया।

इसके बाद हाईकोर्ट ने 23 दिसंबर 2025 को आदेश दिए थे कि यदि इन 91 पदों में याचिकाकर्ता मेरिट में आते हैं तो निगम उन्हें कानून के अनुसार टीएमपीए के पद पर नियुक्त करे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि यह राहत केवल याचिकाकर्ताओं तक सीमित रहेगी।

इसके बावजूद आदेशों पर अमल नहीं होने के कारण याचिकाकर्ताओं ने एक बार फिर हाईकोर्ट का रुख किया, जिस पर अब अदालत ने निगम को सख्त निर्देश जारी किए हैं।

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