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हिमाचल: शराब और बीयर के लाइसेंस फीस में बड़ा बदलाव, एक अप्रैल से प्रभावी हुए नए नियम

Anil Kashyap
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न्यूज अपडेट्स 
शिमला, 18 अप्रैल। राज्य कर एवं आबकारी विभाग ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए नई आबकारी नीति की घोषणा कर दी है। विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, प्रदेश में शराब, बीयर और वाइन की बॉटलिंग, बिक्री और वितरण से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं, जो 1 अप्रैल, 2026 से पूरे राज्य में लागू हो गए हैं। नई नीति के तहत विदेशी शराब की बॉटलिंग पर लगने वाले शुल्कों को पुनर्गठित किया गया है।

राज्य के भीतर खपत के लिए लीज या फ्रैंचाइजी आधार पर बॉटलिंग करने पर प्रति 750 मिलीलीटर की इकाई पर 10.50 रुपए का शुल्क लगेगा, जबकि निर्यात के लिए यह दर 2.50 रुपए निर्धारित की गई है। इसी तरह, निर्माताओं द्वारा अपने स्वयं के ब्रांड की बॉटलिंग के लिए राज्य में खपत पर 6.50 रुपए और निर्यात पर 1.50 रुपए प्रति इकाई शुल्क देय होगा। देसी शराब की बॉटलिंग पर 2 रुपए और निर्यात पर 1 रुपए प्रति इकाई की दर तय की गई है।

विभाग ने विभिन्न श्रेणियों के लाइसैंस के लिए वार्षिक फिक्स्ड फीस में भी बदलाव किए हैं। होलसेल वेंड (एल-1) के लिए 50,00,000 प्रति वर्ष, होटल लाइसैंस (एल-3, एल-4 और एल-5 संयुक्त) में कमरों की संख्या के आधार पर 1.50 लाख (7-25 कमरे) से लेकर 9.50 लाख (76 से अधिक कमरे) तक वार्षिक फीस तय की गई है। फाइव स्टार होटल के तहत 12.50 लाख वार्षिक, बीयर और माइक्रो-ब्रूअरी के लिए बीयर लाइसैंस (बी-1) के लिए न्यूनतम 20 लाख की फीस के साथ प्रति 650 मिलीलीटर बॉटल पर 2.50 रुपए (राज्य में खपत) और 1.50 रुपए (निर्यात) का शुल्क लगेगा।

नई नीति में शराब के ठेकों की स्थिति को लेकर कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। शहरी क्षेत्रों में ठेकों की दूरी प्रमुख धार्मिक स्थलों और शैक्षणिक संस्थानों से कम से कम 100 मीटर होनी चाहिए। विशेष रूप से शिमला के जाखू और संकट मोचन मंदिर, ऊना के चिंतपूर्णी, कांगड़ा के ज्वाला जी और बिलासपुर के नैना देवी जैसे प्रमुख मंदिरों से शराब के ठेकों की न्यूनतम दूरी 600 मीटर अनिवार्य कर दी गई है।

सभी खुदरा शराब विक्रेताओं के लिए अपने वैंड्स में कम से कम 7 दिनों के बैकअप के साथ सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, दुकानों पर हिंदी और अंग्रेजी में वैधानिक चेतावनी प्रदर्शित करना आवश्यक है कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को शराब नहीं बेची जाएगी और शराब पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। यह आदेश वित्तायुक्त (आबकारी) डा. यूनुस द्वारा जारी किए गए हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य के राजस्व को बढ़ाना और शराब के व्यापार में पारदर्शिता लाना है।

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