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हिमाचल: MLA बिक्रम ठाकुर के प्रयासों से बाँस पर लगने वाले टैक्स की छुट्टी, सदन में उठाया था मुद्दा

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कांगड़ा, 23 मार्च। हिमाचल प्रदेश के जसवां प्रागपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक एवं पूर्व उद्योग मंत्री बिक्रम ठाकुर द्वारा विधानसभा में उठाए गए एक महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दे पर प्रदेश सरकार ने ऐतिहासिक मुहर लगा दी है। विधायक बिक्रम ठाकुर ने सदन के भीतर दृढ़तापूर्वक तर्क देते हुए सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि भारतीय वन अधिनियम 1967 के अंतर्गत केंद्र सरकार ने बांस की प्रजातियों को वृक्ष की श्रेणी से बाहर कर दिया है और अब इसे एक झाड़ी अथवा घास के रूप में वर्गीकृत किया गया है। 

उन्होंने स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश के अधिकांश किसान अपनी निजी भूमि पर बांस उगाते हैं और उसे खुले बाजार में बेचकर अपनी आजीविका चलाते हैं, किंतु वृक्ष की श्रेणी से बाहर होने के बाद भी राज्य सरकार द्वारा बांस पर टैक्स वसूल किया जा रहा था, जो कि विधिक रूप से पूरी तरह अनुचित और अतार्किक था।

झाड़ी की श्रेणी में होने के कारण बांस के क्रय-विक्रय पर किसी भी प्रकार का टैक्स नहीं लिया जा सकता, लेकिन दुर्भाग्यवश पूर्व में सरकार इस विसंगति से अनजान बनी हुई थी। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश के हजारों किसानों को अपने ही खेतों में उगाए गए बांस के कटान की अनुमति के लिए पटवारियों और वनरक्षकों के कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते थे और जटिल औपचारिकताओं का सामना करना पड़ता था। विधायक बिक्रम ठाकुर द्वारा सदन में इस ज्वलंत मामले को प्रभावशाली ढंग से उठाए जाने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधायक के तर्कों को न्यायसंगत स्वीकार किया और सदन में यह बड़ा ऐलान किया कि आगामी समय में बांस पर किसी भी प्रकार का टैक्स वसूल नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी आश्वस्त किया कि जहां किसानों को यह छूट दी जाएगी, वहीं यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि सरकारी भूमि से बिना अनुमति के कोई भी बांस का पौधा न काटा जाए।

विधायक बिक्रम ठाकुर की इस बड़ी उपलब्धि पर जसवां प्रागपुर क्षेत्र के किसानों ने गहरा आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके विधायक ने किसानों की पीड़ा को सही मंच पर रखा है। विशेष रूप से टोकरी और अन्य हस्तशिल्प उत्पाद बनाने वाला वह वर्ग, जिसकी पूरी आजीविका ही बांस पर निर्भर है, इस निर्णय से गद्गद् है। विधानसभा सत्र शुरू होने से पूर्व सुरेश कुमार के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने विधायक बिक्रम ठाकुर से भेंट कर इस समस्या के समाधान का आग्रह किया था, जिसे विधायक ने सहर्ष स्वीकार कर सदन में उठाया। स्थानीय किसानों राकेश पठानिया, वीरेंद्र सिंह, सुरेश ठाकुर, रणजीत सिंह, विनोद शर्मा, संजीव कुमार, राजेश कुमार तथा विपिन कुमार ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि बिक्रम ठाकुर सदैव किसानों के हितों की रक्षा करते रहे हैं, जैसा कि उन्होंने पूर्व की धूमल सरकार के समय 'खुदरो दरख्तान मिलकीयत सरकार' के मामले में भी किसानों को बड़ी राहत दिलवाई थी।

यह भी उल्लेखनीय है कि उद्योग मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान बिक्रम ठाकुर ने देहरा विधानसभा क्षेत्र के चनौर में औद्योगिक कलस्टर स्थापित किया था, जहां बांस आधारित उद्योगों की नींव रखी गई थी। इन उद्योगों के मालिकों ने स्थानीय किसानों की हजारों कनाल भूमि पर बांस की खेती करवाई है, जिसे अब टैक्स मुक्त होने के बाद किसानों को उनके उत्पाद की और भी बेहतर कीमत प्राप्त होगी। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद अब किसान अपनी इच्छा अनुसार अच्छे दामों पर बांस का व्यापार कर सकेंगे, जिससे न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी बल्कि प्रदेश के किसानों को लाखों रुपए का सीधा लाभ पहुंचेगा। इस ऐतिहासिक समाधान से हिमाचल प्रदेश के असंख्य परिवारों में हर्ष की लहर दौड़ गई है और उद्योगपतियों ने भी मुख्यमंत्री सुक्खू के साथ-साथ विधायक बिक्रम ठाकुर के विजन की सराहना की है।

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