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बिलासपुर, 28 मार्च। उप-निदेशक पशु स्वास्थ्य एवं प्रजनन, बिलासपुर डॉ. विनोद कुंदी ने जानकारी देते हुए बताया कि पशुपालन विभाग, हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा अधिसूचित पशु मित्र नीति-2025 को लेकर उठ रही आशंकाओं पर विभाग ने स्थिति स्पष्ट कर दी है।
उन्होंने कहा कि हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया में पशु मित्रों की नियुक्ति के लिए निर्धारित शारीरिक परीक्षण को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि यह परीक्षण केवल कार्यात्मक फिटनेस का आकलन है। पशु मित्र के कार्यों में बड़े पशुओं को संभालना, बीमार भेड़-बकरियों (लगभग 25 किलोग्राम) को उठाना और विभिन्न योजनाओं के तहत 50 किलोग्राम तक पशु आहार का परिवहन शामिल है। ऐसे में न्यूनतम शारीरिक क्षमता और सहनशक्ति आवश्यक है, ताकि कार्यकर्ता और पशुधन दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
डॉ. कुंदी ने स्पष्ट किया कि यह कोई प्रतिस्पर्धात्मक सहनशक्ति परीक्षा नहीं, बल्कि सौंपे गए कार्यों को सुरक्षित रूप से निभाने की क्षमता का सत्यापन है। यह परीक्षण सभी अभ्यर्थियों पर समान रूप से लागू होता है और इसका उद्देश्य किसी भी वर्ग विशेष के साथ भेदभाव करना नहीं है।
उन्होंने बताया कि अब तक 315 अभ्यर्थियों की शारीरिक परीक्षा आयोजित की जा चुकी है और किसी को भी गंभीर चोट लगने की कोई घटना सामने नहीं आई है। जिला मंडी के धर्मपुर उपमंडल में सामने आई घटना में भी अभ्यर्थी को कोई गंभीर चोट नहीं आई और उसने परीक्षा पूरी कर ली थी। विभाग द्वारा सभी परीक्षा स्थलों पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। डॉ. कुंदी ने लोगों से अपील की कि वे अपुष्ट खबरों के बजाय अधिसूचित नीति पर ही भरोसा करें।
उन्होंने आगे बताया कि व्यापक समीक्षा के बाद राज्य सरकार ने पशु मित्र नीति में संशोधन किया है। नए प्रावधानों के तहत पहले के शारीरिक परीक्षण की जगह अब शारीरिक दक्षता परीक्षण लागू किया गया है। इसमें पुरुष अभ्यर्थियों के लिए 5000 मीटर दौड़ 30 मिनट में और महिला अभ्यर्थियों के लिए 1500 मीटर दौड़ 10 मिनट में पूरी करना अनिवार्य होगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जो अभ्यर्थी पहले ही शारीरिक परीक्षा पास कर चुके हैं, उन्हें नई नीति के तहत भी पात्र माना जाएगा, जबकि जो पहले सफल नहीं हो पाए थे, उन्हें संशोधित नियमों के अनुसार दोबारा मौका दिया जाएगा।
