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बिलासपुर, 17 जनवरी। शहर के मुख्य बस स्टैंड पर शनिवार दोपहर करीब एक बजे उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब दो युवकों के बीच खुलेआम झड़प हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोनों के बीच कहासुनी इतनी बढ़ गई कि हाथापाई तक की नौबत आ गई और शोर-शराबा बस स्टैंड से सटे चौक तक गूंजता रहा।
हैरानी की बात यह रही कि जिस चौक क्षेत्र में आमतौर पर पुलिस की मौजूदगी रहती है, वहां घटना के बावजूद पुलिस को मौके पर पहुंचने में करीब 25 से 30 मिनट का समय लग गया। इस देरी ने पुलिस की तत्परता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक और संवेदनशील स्थान पर किसी भी विवाद की सूचना मिलते ही त्वरित कार्रवाई अपेक्षित होती है। लेकिन इतने समय तक पुलिस का न पहुंचना कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर चिंता पैदा करता है।
लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि पुलिस द्वारा विभिन्न आयोजनों, जैसे जल तरंग जोश महोत्सव आदि में ड्रग टेस्ट किट दिखाकर नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इन किटों की उपलब्धता और वास्तविक उपयोग पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। उनका कहना है कि यदि थानों और फील्ड में ड्रग टेस्ट किट वास्तव में उपलब्ध हों, तो किसी भी संदिग्ध स्थिति में त्वरित प्रारंभिक जांच संभव हो सकती है।
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि पुलिस केवल जागरूकता कार्यक्रमों तक सीमित न रहे, बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर घटनाओं के दौरान त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करे। उनका कहना है कि कानून-व्यवस्था में आम जनता का विश्वास तभी कायम रह सकता है, जब पुलिस समय पर मौके पर पहुंचे और ठोस तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करे।
