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हिमाचल: रिटायर्ड मित्रों पर मेहरबान सुक्खू सरकार, व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर व्यवस्था पतन: जयराम

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मंडी, 18 जनवरी। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रदेश की वर्तमान कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर तीखा प्रहार करते हुए कहा है कि यह सरकार पूरी तरह से 'मित्रों की सरकार' बनकर रह गई है, जिसे प्रदेश के लाखों बेरोजगार युवाओं के भविष्य की कोई चिंता नहीं है। मंडी से जारी प्रैस बयान में उन्होंने कहा कि सत्ता में आने से पहले कांग्रेस ने युवाओं को हर साल एक लाख नौकरियां देने का लुभावना वायदा किया था, लेकिन 2 साल बीत जाने के बाद भी स्थिति इसके बिल्कुल उलट है और शिक्षित युवा सड़कों पर धक्के खाने को मजबूर हैं। 

जयराम ठाकुर ने सीधा आरोप लगाया कि सुक्खू सरकार में योग्यता और वरिष्ठता को दरकिनार कर केवल चाटुकारिता को पुरस्कृत किया जा रहा है, जिसका उदाहरण एक तहसीलदार मित्र को तमाम प्रशासनिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर एचएएस अधिकारी बनाना है, जबकि यह मामला माननीय उच्च न्यायालय में लंबित है।

उन्होंने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार ने 530 पटवारी पदों के लिए विज्ञापन निकालकर बेरोजगारों से परीक्षा शुल्क के नाम पर 12 करोड़ रुपए से अधिक की राशि वसूल ली, लेकिन अभी तक लिखित परीक्षा आयोजित नहीं की गई। इसके विपरीत, सरकार चोर दरवाजे से अपने चहेते सेवानिवृत्त कर्मचारियों को इन्हीं पदों पर पुनर्नियुक्ति दे रही है, जो प्रदेश के 1.87 लाख बेरोजगार अभ्यर्थियों के साथ एक क्रूर मजाक है। जयराम ठाकुर ने कहा कि एक तरफ मुख्यमंत्री खजाना खाली होने का रोना रोकर जनता पर टैक्स लगा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ चहेतों को रिटायरमैंट के बाद मोटी पगार और आलीशान दफ्तर बांटकर संसाधनों की लूट मचा रहे हैं। उन्होंने चयन आयोगों को बंद करने और परिणामों को लटकाने को युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया।

इसके अतिरिक्त, उन्होंने 'मुख्यमंत्री शगुन योजना' की अनदेखी पर भी सरकार को घेरा और कहा कि सिरमौर में बजट के अभाव में 193 लाभार्थियों के करीब 60 लाख रुपए ट्रेजरी में रोक दिए गए हैं, जिससे गरीब परिवार बेटियों की शादी के लिए कर्ज लेने को मजबूर हैं। 

उन्होंने इसे 'व्यवस्था परिवर्तन' नहीं बल्कि 'व्यवस्था का पतन' करार दिया। अंत में नेता प्रतिपक्ष ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने सेवानिवृत्त लोगों की पुनर्नियुक्ति पर रोक नहीं लगाई और भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शिता के साथ अविलंब पूरा नहीं किया, तो भाजपा सड़कों से लेकर सदन तक उग्र आंदोलन करेगी।

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