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शिमला, 19 जनवरी। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर भले ही हाईकोर्ट ने स्पष्ट दिशा.निर्देश दे दिए हों और राज्य निर्वाचन आयोग ने तैयारियां तेज कर दी हों, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि चुनावों पर संशय अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। पहले मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आपदा प्रबंधन अधिनियम का हवाला देकर पंचायत चुनावों की तारीख आगे बढ़ाने के संकेत दिए, और अब पंचायती राज विभाग के सचिव का लंबी छुट्टी पर जाना इस अनिश्चितता को और गहरा कर रहा है।
हिमाचल प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ने हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत 20 जनवरी को एक अहम बैठक बुलाई है। इस बैठक में पंचायत चुनावों की रूपरेखा, कार्यक्रम और प्रशासनिक तैयारियों पर मंथन किया जाएगा। बैठक की अध्यक्षता राज्य निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची करेंगे। लेकिन बड़ी बात यह है कि जिस विभाग के तहत इन चुनावों की रूपरेखा बननी है उसी विभाग के सचिव लंबी छुट्टी पर चले गए हैं। पंचायती राज विभाग के सचिव सी पाल रासु के लंबे अवकाश पर चले जाने से विभागीय स्तर पर समन्वय को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि पंचायत चुनाव 30 अप्रैल से पहले करवाए जाएं और इससे जुड़ी आरक्षण रोस्टर व मतदाता सूचियों की प्रक्रिया 28 फरवरी तक पूरी की जाए। इसी समयसीमा को ध्यान में रखते हुए निर्वाचन आयोग अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने की कोशिश में जुटा है।
मंगलवार को होने वाली बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के मौजूदा प्रतिनिधियों का कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त हो रहा है। यदि समय रहते चुनावी कार्यक्रम तय नहीं हुआ, तो पंचायत स्तर पर प्रशासनिक शून्यता की स्थिति भी बन सकती है।
हालांकि, पंचायत चुनावों को लेकर सरकार और निर्वाचन आयोग के रुख में फर्क साफ नजर आ रहा है। राज्य निर्वाचन आयोग पंचायतों में किसी बड़े बदलाव के पक्ष में नहीं है और केवल जिला परिषद वार्डों तक सीमित संशोधन चाहता है। वहीं, राज्य सरकार नई पंचायतों के गठन और मौजूदा पंचायतों के पुनर्गठन के मूड में दिखाई दे रही है। यदि पंचायतों या मतदाता सूचियों में किसी भी प्रकार का बदलाव होता है, तो आयोग ने 28 फरवरी तक पूरी प्रक्रिया हर हाल में पूरी करने का रुख अपनाया है।
