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बिलासपुर, 23 जनवरी। हिमाचल प्रदेश के क्षेत्रीय लाइसेंसिंग एवं पंजीकरण प्राधिकरण (आरएलए) बिलासपुर में एक ऐसे गिरोह का खुलासा हुआ है जिसने सरकारी पोर्टल की सुरक्षा में सेंध लगाकर चोरी की गाड़ियों को 'सफेद' करने का खेल रचा। दिल्ली क्राइम ब्रांच और स्थानीय प्रशासन की रडार पर अब वह "मास्टरमाइंड" है, जिसने तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी की। यह मामला सिर्फ कागजों की जालसाजी का नहीं, बल्कि करोड़ों के काले खेल और सिस्टम के भीतर बैठे 'दीमकों' की मिलीभगत का है।
मुख्य आरोपी फरार, दिल्ली पुलिस की दबिश
दिल्ली क्राइम ब्रांच की तफ्तीश अब बिलासपुर से होते हुए झंडूता तक पहुँच गई है। मामले के मुख्य सूत्रधार माने जा रहे सीनियर असिस्टेंट गौरव की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने कई जगहों पर छापेमारी की। हालांकि, गौरव पुलिस के पहुंचने से पहले ही रफूचक्कर हो गया। चर्चा है कि वह कानूनी शिकंजे से बचने के लिए दिल्ली में अग्रिम जमानत की जुगत में है। पुलिस ने आरोपी की आलीशान जीवनशैली और महंगी कारों का ब्योरा जुटाया है, जिनकी तस्वीरें साक्ष्य के तौर पर ली गई हैं।
ऐसे रचा गया जालसाजी का चक्रव्यूह
जांच में सामने आया है कि यह पूरा खेल उस समय खेला गया जब वाहनों के पंजीकरण पोर्टल को BS-4 से BS-6 मानक में अपडेट किया जा रहा था। इस तकनीकी बदलाव के दौरान बैकएंड के जरिए सैकड़ों चोरी की गाड़ियों का डेटा सिस्टम में फीड कर दिया गया।
आईडी की चोरी: आरोपी गौरव पर आरोप है कि उसने अन्य अधिकारियों के गोपनीय लॉगिन आईडी और पासवर्ड का अवैध इस्तेमाल कर इन फर्जी पंजीकरणों को मंजूरी दी।
खुलासा: इससे पहले गिरफ्तार हुए कर्मचारी सुभाष चंद ने पूछताछ में कबूला कि गौरव ही इस पूरे षडयंत्र का असली रचयिता है। सुभाष को फिलहाल सस्पेंड कर दिया गया है।
सरकार का कड़ा रुख: उच्च स्तरीय जांच शुरू
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश सरकार ने इसे एक बड़े प्रशासनिक घोटाले के रूप में लिया है।
कमेटी का गठन: परिवहन निदेशालय ने तीन विशेषज्ञों की एक टीम बनाई है, जिसमें आईटी मैनेजर और मोटर वाहन निरीक्षक शामिल हैं।
15 दिन की डेडलाइन: इस समिति को दो हफ्तों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है, ताकि घोटाले की जड़ तक पहुंचा जा सके।
सस्पेंशन की तैयारी: उपायुक्त राहुल कुमार ने आरोपी गौरव को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने और उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने के निर्देश दे दिए हैं।
इंदौरा सीरीज (HP-97) पर टिकी है जांच
प्रशासन को मिली शुरुआती शिकायतों में विशेष रूप से HP-97 (इंदौरा) सीरीज के तहत पंजीकृत हुए BS-4 वाहनों पर संदेह जताया गया है। माना जा रहा है कि नियमों को ताक पर रखकर बाहरी राज्यों की गाड़ियों को इस सीरीज के तहत अवैध रूप से पंजीकृत किया गया।
