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कांगड़ा, 03 जनवरी। हिमाचल प्रदेश में गरीबी रेखा से नीचे (BPL) और अंत्योदय सूचियों के पुनर्गठन ने ग्रामीण क्षेत्रों में जबरदस्त हलचल पैदा कर दी है। सरकार का दावा है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य वास्तविक जरूरतमंदों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग तस्वीर पेश कर रही है। खासतौर पर कांगड़ा जिले के जसवां–परागपुर और देहरा विधानसभा क्षेत्रों में हुई भारी छंटनी ने हजारों गरीब परिवारों को चिंता और असमंजस में डाल दिया है। जसवां–परागपुर विधानसभा क्षेत्र में पहले जहां 3237 परिवार BPL सूची में शामिल थे, वहीं पुनर्गठन के बाद केवल 278 परिवारों को ही पात्र माना गया। यानी करीब 2959 परिवार सूची से बाहर हो गए। इसी तरह देहरा विधानसभा क्षेत्र में पहले 3946 परिवार BPL श्रेणी में दर्ज थे, लेकिन अब केवल 195 परिवार ही पात्र ठहराए गए हैं और 3751 परिवार अपात्र घोषित कर दिए गए। इतनी बड़ी संख्या में नाम कटने से गांवों में नाराजगी और रोष का माहौल बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि कई परिवार वर्षों से सरकारी राशन, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य कल्याणकारी योजनाओं पर निर्भर थे। अचानक सूची से बाहर होने के बाद उनके सामने रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने का संकट खड़ा हो गया है। लोगों को समझ नहीं आ रहा कि वे अब सरकारी मदद के बिना अपना जीवन कैसे चलाएंगे।
सूचियों के पुनर्गठन की प्रक्रिया पर पंचायत स्तर पर भी सवाल उठ रहे हैं। कई पंचायतों में ग्राम सभा का कोरम पूरा नहीं हो पाया, जिसके चलते सरकार ने उपमंडल अधिकारी, खंड विकास अधिकारी और पंचायत निरीक्षक की खंड स्तरीय कमेटी गठित की। पंचायत प्रतिनिधियों का आरोप है कि निर्वाचित प्रधानों को इस पूरी प्रक्रिया से अलग रखा गया, जिससे पारदर्शिता प्रभावित हुई। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का मानना है कि सरकार की नई गाइडलाइन इस भारी छंटनी की बड़ी वजह है। नई शर्तों के अनुसार यदि किसी परिवार के पास एक भी पक्का कमरा है या परिवार में 18 से 59 वर्ष की आयु का कोई पुरुष सदस्य है, तो उसे BPL के लिए अपात्र माना गया है। इसके अलावा भूमि सीमा को दो हेक्टेयर से घटाकर एक हेक्टेयर कर दिया गया है, जिससे कई सीमांत किसान भी सूची से बाहर हो गए।
घियोरी, जंडौर और वणी पंचायतों के प्रधानों ने आरोप लगाया है कि मात्र 50 हजार रुपये वार्षिक आय वाले अत्यंत गरीब परिवारों को भी BPL सूची से बाहर कर दिया गया। घियोरी पंचायत में तो 182 परिवारों में से केवल 5 परिवारों को ही BPL सूची में शामिल किया गया, जिससे स्थिति और भी चिंताजनक हो गई है। वहीं प्रशासन का कहना है कि पूरी प्रक्रिया सरकार की गाइडलाइन के अनुसार की गई है।
खंड विकास अधिकारी परागपुर अशोक कुमार के अनुसार, कम आवेदन आने के कारण जांच के बाद केवल 278 परिवार पात्र पाए गए। देहरा के समाज शिक्षा एवं खंड योजना अधिकारी संजीव कुमार का कहना है कि 195 परिवारों का चयन नियमों के तहत किया गया है। इसके बावजूद गांवों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह व्यवस्था वास्तव में गरीबों के हित में है। जिन परिवारों के लिए BPL और अंत्योदय योजनाएं सहारे का आधार थीं, उनके लिए सूची से बाहर होना एक बड़ा सामाजिक और आर्थिक झटका बन गया है।
