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शिमला, 03 जनवरी। पंचायती राज विभाग ने एक बड़ा निर्णय लिया है। पेयजल योजनाओं का संचालन और रखरखाव अब ग्राम पंचायतों के पास होगा। जल जीवन मिशन के तहत यह कार्य सौंपा गया है। इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है।प्रदेश सरकार ने हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की शक्तियों का उपयोग किया है। इस निर्णय से ग्रामीण स्तर पर जल प्रबंधन में स्थानीय भागीदारी बढ़ेगी। योजनाओं का रखरखाव भी बेहतर होगा।
ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति का गठन
प्रत्येक पंचायत में ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति का गठन अनिवार्य किया गया है। पंचायत की सभी निर्वाचित महिला पदाधिकारी इस समिति की सदस्य होंगी। समिति में कम से कम पचास प्रतिशत सदस्य महिलाएं होंगी। पंचायत प्रस्ताव के माध्यम से समिति के एक सदस्य को अध्यक्ष नामित किया जाएगा। गांव के सभी वर्गों को बैठकों में विशेष आमंत्रित के रूप में शामिल किया जाएगा। महिलाओं और हाशिए के समुदायों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
वित्तीय अधिकार और जिम्मेदारियां
जल सेवा शुल्क निर्धारित करने और वसूली का अधिकार पंचायत को दिया गया है। केंद्र, राज्य वित्त आयोग और अन्य अनुदानों का उपयोग केवल जल आपूर्ति के लिए होगा। संचालन और रखरखाव के खर्च इसी कोष से पूरे किए जाएंगे।जल आपूर्ति योजनाओं से जुड़े सभी वित्तीय लेनदेन का प्रबंधन समिति करेगी। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी खर्चों का हिसाब रखा जाएगा। नियमित ऑडिट की व्यवस्था भी की जाएगी।
संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी
गांव की जल आपूर्ति प्रणाली के नियमित संचालन की जिम्मेदारी पंचायत की होगी। मरम्मत कार्य भी पंचायत द्वारा ही कराए जाएंगे। पंप ऑपरेटर और तकनीशियनों की सेवाएं ली जा सकेंगी। लेकिन स्थायी नियुक्ति राज्य सरकार की अनुमति के बिना नहीं होगी। इससे अनावश्यक खर्चों पर अंकुश लगेगा। कार्य कुशलता और गुणवत्ता बनाए रखी जाएगी।
संपत्ति प्रबंधन और दस्तावेजीकरण
पेयजल से संबंधित सभी परिसंपत्तियों का विवरण ग्राम संपत्ति रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा। इसमें पाइपलाइन, पंप, टैंक और अन्य उपकरण शामिल होंगे। उचित निगरानी और रखरखाव सुनिश्चित करना पंचायत का दायित्व होगा। संपत्ति प्रबंधन के लिए दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। नियमित जांच और मरम्मत का कार्यक्रम बनाया जाएगा। समय पर रखरखाव से संपत्ति का जीवनकाल बढ़ेगा।
जल गुणवत्ता परीक्षण
फील्ड टेस्ट किट से जल गुणवत्ता का नियमित परीक्षण किया जाएगा। मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में आवधिक जांच भी करवानी होगी। परीक्षण परिणामों की जानकारी समुदाय को देना अनिवार्य किया गया है। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों का विश्वास जमेगा। दूषित पानी की समस्या का तुरंत पता चल सकेगा। समय पर उपचारात्मक कार्रवाई की जा सकेगी।
सभी परिवारों तक पहुंच सुनिश्चित करना
बिखरी बस्तियों सहित हर ग्रामीण परिवार तक जल कनेक्शन सुनिश्चित करना होगा। सेवा की गुणवत्ता बनाए रखनी होगी। किसी भी परिवार को पेयजल से वंचित नहीं रखा जाएगा।दूरदराज के क्षेत्रों में विशेष व्यवस्था की जाएगी। आखिरी व्यक्ति तक पानी पहुंचाना प्राथमिकता होगी। इसके लिए योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। यह निर्णय स्थानीय स्वशासन को मजबूत करेगा। ग्रामीण समुदाय अपने संसाधनों का प्रबंधन खुद कर सकेंगे। जल संरक्षण और सतत उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।
