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शिमला, 03 जनवरी। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव समय पर होंगे या नहीं, इस पर सस्पेंस गहरा गया है। शुक्रवार को हाईकोर्ट में इस मुद्दे पर करीब तीन घंटे तक जोरदार बहस हुई। राज्य सरकार ने अदालत में हाथ खड़े कर दिए हैं। सरकार का कहना है कि अभी चुनाव कराना संभव नहीं है। इस बड़ी हिमाचल न्यूज ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। कोर्ट ने सरकार के रवैये पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा लगता है सरकार चुनाव कराने में खुद को लाचार महसूस कर रही है। अब इस मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को होगी।
सुनवाई के दौरान सरकार ने अपनी मजबूरी गिनाई। सरकार ने कोर्ट को बताया कि पुनर्सीमांकन की अधिसूचना रद्द हो चुकी है। अब 10 जनवरी तक लोगों से आपत्तियां मांगी गई हैं। नियमों के मुताबिक चुनाव की तैयारी में कम से कम छह महीने का अतिरिक्त समय लगेगा। इसलिए अभी चुनाव कराना मुमकिन नहीं है। वहीं, याचिकाकर्ता के वकील ने इसका कड़ा विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि सरकार जानबूझकर चुनाव टाल रही है। उनका कहना था कि रद्द की गई अधिसूचना केवल शिमला जिला परिषद तक सीमित थी। यह हिमाचल न्यूज अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय है।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया की खंडपीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद बड़ा फैसला लिया। अब इस मामले की सुनवाई न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रोमेश वर्मा की खंडपीठ करेगी। कोर्ट का मानना है कि यह एक संवैधानिक मुद्दा है। जिस बेंच ने पहले पुनर्सीमांकन वाली अधिसूचना को खारिज किया था, वही इस मामले को बेहतर समझ सकती है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि चुनाव आयोग को पार्टी न बनाना एक तकनीकी पहलू है।
बहस के दौरान मुख्य न्यायाधीश की बेंच ने सरकार को आईना दिखाया। कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार चुनाव कराने में खुद को ‘अपाहिज’ महसूस कर रही है। यह टिप्पणी 5 दिसंबर 2025 के उस फैसले के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है, जब दूसरी खंडपीठ ने पंचायती राज एक्ट के संशोधित नियमों को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने तब कहा था कि चुनाव क्षेत्रों से छेड़छाड़ करना मनमाना और अन्यायपूर्ण है। फिलहाल, जनता की नजरें अब मंगलवार को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं।
