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धर्मशाला, 04 जनवरी। हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला के गवर्नमेंट कॉलेज की छात्रा की मौत से जुड़ा मामला अब हाई.प्रोफाइल रूप ले चुका है। रैगिंग और यौन उत्पीड़न के आरोपों के बीच जहां सरकार, पुलिस और जांच एजेंसियां सक्रिय हैं, वहीं अब इस प्रकरण में आरोपी असिस्टेंट प्रोफेसर अशोक कुमार ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी चुप्पी तोड़ी है। दो बेटियों के पिता होने का हवाला देते हुए उन्होंने कहा है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो वे हर सजा भुगतने को तैयार हैं। उनका दावा है कि निष्पक्ष जांच ही इस मामले में सच्चाई को सामने ला सकती है।
मीडिया से बातचीत में प्रोफेसर अशोक कुमार ने भावुक लहजे में कहा कि उनकी भी दो बेटियां हैं और वे इस मामले को एक पिता के नजरिये से समझते हैं। उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए, ताकि दिवंगत छात्रा को न्याय मिल सके और सच्चाई सामने आए।
अपने ऊपर लगे गंभीर आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए अशोक कुमार ने कहा कि यदि कॉलेज परिसर में छात्रा के साथ किसी तरह की गलत घटना हुई होती, तो इसकी शिकायत कॉलेज प्रशासन या एंटी.रैगिंग कमेटी के समक्ष दर्ज होनी चाहिए थी। उनके अनुसार अब तक रिकॉर्ड में ऐसी कोई औपचारिक शिकायत सामने नहीं आई है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जांच एजेंसियां हर पहलू से जांच करें, ताकि किसी भी तरह का संदेह न रहे।
सरकार और शिक्षा विभाग द्वारा किए गए निलंबन पर पूछे गए सवाल के जवाब में आरोपी प्रोफेसर ने प्रशासन के फैसले को सही ठहराया। उन्होंने कहा कि निलंबन से जांच प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी और यह कदम पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जरूरी है। उनका कहना है कि वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे।
बता दें कि इस मामले में सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए आरोपी प्रोफेसर अशोक को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। वहीं शिक्षा विभाग की और से एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी मामले की जांच करेगी और अगले तीन दिन में जांच की रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। छात्रा के पिता की शिकायत पर पुलिस ने भी एफआईआर दर्ज कर ली है। हालांकि अभी तक इस मामले में कोई गिरत्तारी नहीं हुई है।
आरोपी प्रोफेसर के बयान के बाद अब सबकी नजरें पुलिस जांच की दिशा पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या जांच में नए तथ्य सामने आएंगे और क्या यह मामला किसी निर्णायक मोड़ तक पहुंचेगा। फिलहाल छात्रा की मौत से जुड़ा यह संवेदनशील प्रकरण शिक्षा संस्थानों में सुरक्षाए एंटी.रैगिंग व्यवस्था और जवाबदेही को लेकर कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
