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बिलासपुर, 03 जनवरी। हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) की बाहरी राज्यों में संचालित बस सेवाएं धीरे-धीरे सीमित होती नजर आ रही हैं। निगम का घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है और वर्तमान में यह लगभग 2 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इसी कड़ी में बिलासपुर डिपो से संचालित कई महत्वपूर्ण बाहरी राज्यों के रूट हाल ही में प्रबंधन द्वारा बंद कर दिए गए हैं, जिससे यात्रियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
जानकारी के अनुसार वर्षों से नियमित रूप से चल रहे सरकाघाट–हरिद्वार, मरोतन–दिल्ली और मनाली–दिल्ली जैसे प्रमुख रूट बंद कर दिए गए हैं। हैरानी की बात यह है कि पर्यटन सीजन के दौरान मनाली के लिए जहां निजी बसों का बड़े पैमाने पर संचालन किया जा रहा है, वहीं HRTC प्रबंधन घाटे का हवाला देकर अपने रूटों को बंद करने की दिशा में काम कर रहा है।
बिलासपुर डिपो से अब दिल्ली के लिए कोई भी सीधी बस सेवा उपलब्ध नहीं है। प्रबंधन का तर्क है कि इन रूटों पर यात्रियों की संख्या कम थी, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे बिलासपुर की जनता को बाहरी राज्यों की सीधी बस सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है।
फोरलेन शुरू होने के बाद पहले ही बिलासपुर से दिल्ली और हरिद्वार जाने वाली बसों की संख्या घट चुकी थी और अब जो कुछ सेवाएं बची थीं, उन्हें भी बंद करने की तैयारी नजर आ रही है। यात्रियों का कहना है कि प्रबंधन को ऐसे कदम उठाने चाहिए थे जिससे HRTC में यात्रियों की संख्या बढ़े, लेकिन इसके उलट हालात सामने आ रहे हैं।
बिलासपुर बस अड्डे पर स्थिति यह है कि यात्रियों को बसों में सीट पाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। कई बार मजबूरी में ओवरलोडिंग के साथ यात्रा करनी पड़ रही है। वहीं, कोरोना काल के बाद बंद हुए कुछ रूट अभी तक शुरू नहीं हो पाए हैं और उन्हें पुनः चालू करने के लिए भी कोई ठोस प्रयास नजर नहीं आ रहा।
यदि रूट बंद करने की नौबत आ गई है तो सवाल यह भी उठ रहा है कि प्रबंधन ने अब तक घाटा कम करने और यात्रियों को आकर्षित करने के लिए क्या प्रयास किए। मौजूदा हालात में HRTC की नीतियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं और जनता बेहतर परिवहन सुविधाओं की मांग कर रही है।
