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बिलासपुर, 18 जनवरी। जनपद के अंतर्गत बागछाल पुल के समीप रविवार देर रात करीब 1 बजे एक भीषण सड़क हादसा हो गया। सड़क निर्माण कार्य में लगे एक टिप्पर के अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिरने से चालक की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान कुलदीप सिंह (49), निवासी गांव धनीपखर के रूप में हुई है। हादसे के बाद निर्माण कंपनी के अधिकारियों के मौके पर न पहुंचने से स्थानीय लोगों और परिजनों में भारी रोष फैल गया, जिसके चलते राष्ट्रीय राजमार्ग-205 करीब दो घंटे तक पूरी तरह बाधित रहा।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार टिप्पर बागछाल पुल के पास से गुजर रहा था, तभी अचानक संतुलन बिगड़ने से वह सड़क से फिसलकर सीधा गहरी खाई में जा गिरा। दुर्घटना इतनी भयावह थी कि चालक को बाहर निकलने का कोई अवसर नहीं मिल सका और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग घटनास्थल पर पहुंचे और पुलिस को अवगत करवाया।
सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। कड़ी मशक्कत के बाद शव को खाई से बाहर निकाला गया। हालांकि, हादसे के कई घंटे बीत जाने के बावजूद संबंधित निर्माण कंपनी का कोई भी अधिकारी घटनास्थल पर नहीं पहुंचा। इससे आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने शव को राष्ट्रीय राजमार्ग पर रखकर जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया।
देखते ही देखते NH-205 के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात पूरी तरह ठप हो गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वारघाट के तहसीलदार मौके पर पहुंचे। इसके बाद एसडीएम स्वारघाट, एसीपी शिवा चौधरी तथा पुलिस लाइन से क्यूआरटी टीम भी घटनास्थल पर तैनात की गई। प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच लंबी बातचीत के बाद मामला शांत हुआ।
तहसीलदार द्वारा पीड़ित परिवार को ₹25,000 की तात्कालिक सहायता प्रदान की गई। प्रशासन की ओर से ₹3,75,000 अतिरिक्त राहत राशि देने की घोषणा की गई, जबकि निर्माण कंपनी प्रबंधन ने भी ₹3,00,000 की फौरी सहायता देने पर सहमति जताई। इसके बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ और जाम हटाया गया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। एसडीएम स्वारघाट ने बताया कि हादसे के कारणों की जांच के लिए एक विशेष जांच समिति गठित की गई है। समिति यह भी जांच करेगी कि सड़क निर्माण में किसी प्रकार की लापरवाही तो नहीं हुई। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उधर, मृतक कुलदीप सिंह अपने पीछे तीन बेटियां और एक बेटा छोड़ गए हैं। वे परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उनकी असमय मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।
