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शिमला, 30 दिसंबर। हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में डॉक्टर और मरीज के बीच हुए विवाद के बाद पैदा हुआ तनाव अब धीरे-धीरे शांत होता नजर आ रहा है। डॉ. राघव नरूला की बर्खास्तगी के विरोध में हड़ताल पर गए रेजिडेंट डॉक्टरों के काम पर लौटने से जहां स्वास्थ्य सेवाएं पटरी पर लौटी हैं, वहीं मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के ताजा बयान ने पूरे मामले को नई दिशा दे दी है। मुख्यमंत्री के शब्दों से यह संकेत साफ तौर पर उभरा है कि डॉ. राघव नरूला की सेवाओं की बहाली की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
सोमवार को मुख्यमंत्री सुक्खू ने रेजिडेंट डॉक्टरों के हड़ताल समाप्त कर ड्यूटी पर लौटने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों के लौटने से आम जनता को राहत मिली है और प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था फिर से सामान्य हुई है। सीएम ने इस मौके पर यह भी स्पष्ट किया कि डॉ. राघव नरूला का टर्मिनेशन रिव्यू करने के लिए नई कमेटी का गठन होगा। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी डॉक्टर के साथ अन्याय नहीं करना चाहती और न ही किसी डॉक्टर का करियर खराब करना उसका उद्देश्य है।
मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि डॉ. राघव नरूला को बर्खास्त करने का फैसला सीधे तौर पर सरकार ने नहीं लिया था। यह कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित विभाग द्वारा की गई थी। अब सरकार पूरे मामले को नए सिरे से परखने जा रही है। इसके लिए एक नई समिति गठित की जाएगी] जो सभी पहलुओं की समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट देगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।
सीएम सुक्खू ने भरोसा दिलाया कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होगी। उन्होंने कहा कि यदि समीक्षा के दौरान किसी भी स्तर पर कोई चूक सामने आती है, तो उसे सुधारा जाएगा। सरकार का मकसद किसी को दंडित करना नहीं] बल्कि सच्चाई सामने लाना है, ताकि भविष्य में इस तरह की परिस्थितियां दोबारा पैदा न हों।
हालांकि मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर डॉ. राघव नरूला की बहाली की घोषणा नहीं की] लेकिन उनके बयान ने यह स्पष्ट कर दिया कि सरकार इस मामले में कठोर रुख अपनाने के बजाय न्यायपूर्ण समाधान की ओर बढ़ रही है। किसी भी डॉक्टर के साथ अन्याय न होने देने की बात और पुनः जांच का आश्वासन] डॉ. राघव नरूला की बर्खास्तगी को रद्द किए जाने की उम्मीद को मजबूत करता है।
तीन दिन तक चली रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल समाप्त होने के बाद आईजीएमसी शिमला सहित प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं सामान्य हो गई हैं। नियमित जांच, टेस्ट और ऑपरेशन दोबारा शुरू कर दिए गए हैं। हड़ताल के दौरान केवल आपातकालीन सेवाएं ही जारी थीं, जिससे मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
मुख्यमंत्री ने दिल्ली से लौटने के बाद रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) को पूरे मामले की विस्तृत जांच का आश्वासन दिया था। इसी भरोसे के बाद आरडीए ने अनिश्चितकालीन हड़ताल वापस लेने का निर्णय किया। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच प्रक्रिया में आरडीए को शामिल किया जाएगा, ताकि डॉक्टरों की बात भी पूरी मजबूती से सामने आ सके।
