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दिल्ली, 24 अगस्त। अगर आप पहली बार लोन लेने की तैयारी में हैं तो आपके लिए एक राहत की खबर है. वित्त मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि पहली बार कर्ज लेने वालों को केवल CIBIL स्कोर न होने के कारण लोन से वंचित नहीं किया जाएगा। संसद के मानसून सेशन के दौरान लोकसभा में जवाब देते हुए, केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों और क्रेडिट संस्थानों को निर्देश दिया है कि नए उधारकर्ताओं के लोन आवेदनों को सिर्फ इसलिए खारिज नहीं किया जा सकता क्योंकि उनका कोई क्रेडिट इतिहास नहीं है।
चौधरी ने कहा, “क्रेडिट संस्थानों के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं के तहत, RBI ने सलाह दी है कि पहली बार कर्ज लेने वालों के आवेदनों को केवल क्रेडिट इतिहास न होने के आधार पर खारिज नहीं करना चाहिए.”
न्यूनतम CIBIL स्कोर की जरूरत नहीं
मंत्री ने यह भी साफ किया कि RBI ने उधारकर्ताओं के लिए कोई न्यूनतम क्रेडिट स्कोर निर्धारित नहीं किया है. उन्होंने कहा, “मौजूदा क्रेडिट व्यवस्था में, बैंक अपनी बोर्ड की ओर से तय पॉलिसी नीतियों और रेगुलेटरी दिशानिर्देशों के आधार पर बिजनेस से जुड़े फैसले लेते हैं. क्रेडिट इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट कई कारकों में से एक इनपुट है।
CIBIL स्कोर क्या है?
CIBIL स्कोर 300 से 900 के बीच का तीन अंकों का नंबर है, जो किसी व्यक्ति की क्रेडिट विश्वसनीयता को दर्शाता है. यह स्कोर पेमेंट इतिहास, एक्टिव लोन और वित्तीय अनुशासन के आधार पर क्रेडिट इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (इंडिया) लिमिटेड (CIBIL) द्वारा जारी किया जाता है. यह बैंकों की ओर से लोन योग्यता का आकलन करने के लिए व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है. हालांकि, मंत्रालय ने जोर दिया कि कम या अनुपस्थित CIBIL स्कोर के आधार पर पहली बार कर्ज लेने वालों को स्वतः अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता.
सख्त जांच जरूरी
CIBIL स्कोर की अनिवार्यता न होने के बावजूद, वित्त मंत्रालय ने बैंकों को लोन मंजूर करने से पहले पूरी जांच करने का निर्देश दिया है. इसमें पेमेंट पैटर्न की जांच, निपटाए गए या री-स्ट्रक्चर्ड लोन का एनालिसिस और डिफॉल्ट या राइट-ऑफ की पहचान शामिल है. चौधरी ने बताया कि क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनियां (CICs) व्यक्तियों से क्रेडिट रिपोर्ट के लिए अधिकतम 100 रुपये तक शुल्क ले सकती हैं.
