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विक्रमादित्य सिंह का भाजपा पर कसा तंज, जब एक नामांकन भरना था तो चुनाव क्यों करवाया

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शिमला, 01 जुलाई । हिमाचल प्रदेश भाजपा में संगठनात्मक बदलाव की प्रक्रिया के तहत अध्यक्ष पद के लिए नामांकन का दौर सोमवार को संपन्न हो गया। हिमाचल भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के लिए मात्र एक ही नामांकन दाखिल किया गया। यह नामांकन वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल ने भरा है। प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए केवल एक नामांकन भरे जाने पर विक्रमादित्य सिंह ने भाजपा पर तंज कसा है। 

लोकतंत्र की आड़ में मनोनयन की राजनीति

लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने भाजपा की आंतरिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि भाजपा सिर्फ लोकतांत्रिक होने का दावा करती है, जबकि असलियत में उसके भीतर कोई लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं चल रही। जब चुनाव में एक ही नामांकन भरा जाए तो इसे लोकतांत्रिक चुनाव नहीं कहा जा सकता। यह तो सिर्फ दिखावा है कि मानो कोई चुनाव हो रहा है, जबकि पहले से ही तयशुदा व्यक्ति को अध्यक्ष बनाया जा रहा है।

दिखावे के लिए ही भरवा देते 1 और नामांकन

विक्रमादित्य ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि यदि भाजपा को दिखावे का ही लोकतंत्र निभाना था तो कम से कम एक और व्यक्ति को नामांकन के लिए कह देते, ताकि चुनाव की प्रक्रिया जैसी कोई बात लगती।  उन्होंने तंज कसा कि बिंदल तो थे ही, किसी और को पकड़ कर नामांकन भरवा देते। अगर स्थानीय नेता नहीं मिलते तो दिल्ली से जो नेता हिमाचल आए थे, उन्हीं में से किसी को खड़ा कर देते। कम से कम लोकतंत्र की एक तस्वीर तो पेश होती।

विक्रमादित्य ने यह भी कहा कि यह भाजपा का आंतरिक मामला हो सकता है, लेकिन जब कोई पार्टी खुद को दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक पार्टी बताती है, तो उससे पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की उम्मीद तो की ही जाती है।

प्रदेश अध्यक्ष को बिंदल का एकमात्र नामांकन

बता दें कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए आज सोमवार को नामांकन की प्रक्रिया रखी गई थी। शिमला में स्थित भाजपा कार्यालय में नामांकन प्रक्रिया हुई। जिसमें मात्र डॉ राजीव बिंदल ने ही नामांकन भरा। हालांकि उनके अलावा भी कई अन्य नेता अध्यक्ष पद की रेस में शामिल थे। लेकिन अंतिम समय पर कोई भी नेता नामांकन भरने नहीं पहुंचा। ऐसे में डॉ राजीव बिंदल निर्विरोध इस पद के दावेदार बन चुके हैं। भाजपा कल मंगलवार को 11 बजे प्रदेश अध्यक्ष पद के नाम को उजागर करेगी। 

क्या मजबूरी में लिया गया फैसला है ये

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हिमाचल प्रदेश में भाजपा ने हालिया उपचुनावों और संगठनात्मक चुनौतियों के मद्देनज़र नेतृत्व को लेकर एक सुरक्षित विकल्प चुना है। डॉण् बिंदल न केवल संगठन में अनुभव रखते हैं बल्कि उनका पुराना कार्यकाल भी भाजपा के लिए अपेक्षाकृत स्थिर रहा है। भाजपा की कोशिश हो सकती है कि वह किसी तरह की गुटबाजी और विवाद से बचकर संगठन को चुनावी मोड में बनाए रखे। लेकिन एक ही नामांकन और निर्विरोध चयन की प्रक्रिया ने विपक्ष को हमला करने का मौका जरूर दे दिया है।

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