ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार यह भुगतान इसलिए करेगी, ताकि उन्हें हुए नुकसान की आंशिक भरपाई की जा सके। साथ ही रसोई गैस की कीमतों को नियंत्रण में रखा जा सके।
मामले से जुड़े लोगों के अनुसार, तेल मंत्रालय ने 28,000 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की थी। लेकिन वित्त मंत्रालय केवल 20,000 करोड़ रुपये के भुगतान के लिए ही राजी हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत अंतिम चरण में हैं, लेकिन अभी आखिरी फैसला लिया जाना बाकी है।
देश की तीन सबसे बड़ी सरकारी तेल कंपनियां कुल 90 फीसदी से अधिक पेट्रोलियम फ्यूल की सप्लाई करती है। बीती तिमाही में कच्चे तेल की रेकॉर्ड कीमतों के चलते इन कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। सरकार यह भुगतान करती है, तो इन कंपनियों को कुछ राहत मिलेगी। हालांकि, फ्यूल पर टैक्स में कटौती और भारी उर्वरक सब्सिडी के चलते पहले से ही प्रभावित सरकारी खजाने पर दबाव बढ़ जाएगा।
