Himachal: जेबीटी भर्ती में बीएड डिग्री धारकों को शामिल करने के फैसले पर रोक : पढ़ें पूरी खबर

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न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने सरकार की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के बाद पुराने फैसले पर अमल करने पर रोक लगाने के आदेश पारित किए। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय को जेबीटी भर्ती पुराने भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के तहत करने की हरी झंडी मिल गई है।

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने जेबीटी के पदों के लिए बीएड डिग्री धारकों को भी शामिल करने के अपने फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने सरकार की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के बाद पुराने फैसले पर अमल करने पर रोक लगाने के आदेश पारित किए। 

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय को जेबीटी भर्ती पुराने भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के तहत करने की हरी झंडी मिल गई है। सरकार ने कुछ माह पूर्व ही जेबीटी के 810 पद भरने का फैसला लिया है। 26 नवंबर को हाईकोर्ट ने जेबीटी भर्ती मामलों पर फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया था कि शिक्षकों की भर्ती के लिए एनसीटीई की ओर से निर्धारित नियम प्रारंभिक शिक्षा विभाग के साथ-साथ अधीनस्थ कर्मचारी चयन आयोग पर भी लागू होते हैं।

कोर्ट ने विभिन्न याचिकाओं को स्वीकारते हुए प्रदेश सरकार को यह आदेश भी दिए थे कि वह 28 जून 2018 की एनसीटीई की अधिसूचना के अनुसार जेबीटी पदों की भर्ती के लिए नियमों में जरूरी संशोधन करे। कोर्ट के फैसले से जेबीटी पदों के लिए बीएड डिग्री धारक भी पात्र हो गए थे लेकिन इस फैसले पर रोक के बाद बीएड डिग्री धारक फिर से इन पदों के लिए दौड़ से बाहर हो गए। 

बीएड डिग्री धारक याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि उन्हें भी जेबीटी भर्ती के लिए कंसीडर किया जाए। वो बीएड डिग्री धारक होने के साथ-साथ टेट उत्तीर्ण भी हैं और एनसीटीई के नियमों के तहत जेबीटी शिक्षक बनने के लिए पात्रता रखते हैं।

हाईकोर्ट का यह फैसला आने के बाद से प्रदेश भर में जेबीटी-डीएलएड प्रशिक्षुओं ने कक्षाओं का बहिष्कार करना शुरू कर दिया था। 30 नवंबर को मंत्रिमंडल की बैठक में सरकार ने हाईकोर्ट में जेबीटी-डीएलएड प्रशिक्षुओं का पक्ष लेने का फैसला लिया। विधि विभाग से करीब एक माह तक इस मामले को लेकर चर्चा करने के बाद शिक्षा निदेशालय ने पुनर्विचार याचिका दायर की। जेबीटी मामले पर आए फैसले की तरह राजस्थान के जोधपुर हाईकोर्ट से आए विपरीत फैसले को पुनर्विचार याचिका में आधार बनाया गया।

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