वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को संसद में एक लिखित जवाब में यह बात कही. उन्होंने कहा कि देश में सरकारी कंपनियों के विनिवेश के लिए सरकार ने खास नीति बनाई है. सरकार का कहना है कि सरकारी कंपनियों के निजीकरण से उनमें निजी कंपनियों की पूंजी लगेगी, टेक्नोलॉजी और कामकाज का विस्तार होगा. इससे सरकारी कंपनियों में पूंजी बढ़ेगी और उनका कामकाज बढ़ेगा।
वित्त मंत्री सीतारमण ने आगे कहा, “विनिवेश से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विचार इस उद्देश्य/मंत्रिमंडल के लिए नामित कैबिनेट कमेटी को सौंपा गया है. कैबिनेट कमेटी/कैबिनेट द्वारा इस संबंध में निर्णय नहीं लिया गया है.” सरकारी बैंकों के निजीकरण से संबंधित विधेयक को संसद के चल रहे शीतकालीन सत्र के लिए सूचीबद्ध किया गया है जो 23 दिसंबर को समाप्त हो रहा है।
गौरतलब है कि 16-17 दिसंबर को सरकारी बैंकों की कर्मचारियों की यूनियनों से देशव्यापी हड़ताल की थी. वह हड़ताल बैंकों के निजीकरण के खिलाफ थी. 2021 के बजट में सरकार ने कहा था कि दो सरकारी बैंकों का निजीकरण किया जाएगा. अन्य सरकारी कंपनियों के निजीकरण के साथ सरकारी बैंकों को भी शामिल किया गया. हालांकि, बैंकों के नाम नहीं बताए गए थे. अब संसद में सरकार ने स्पष्टीकरण दिया है कि केंद्रीय कैबिनेट ने बैंकों के निजीकरण को लेकर अभी कोई फैसला नहीं लिया है।
