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बिलासपुर, 11 अगस्त। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) बिलासपुर के प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने हिमाचल प्रदेश में चिकित्सा क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। चिकित्सकों की टीम ने लगभग पूरी तरह से कट चुके एक हाथ की सफलतापूर्वक रिवैस्कुलराइजेशन सर्जरी कर मरीज का हाथ बचा लिया। इसे हिमाचल प्रदेश में पहली सफल हैंड रिवैस्कुलराइजेशन सर्जरी बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार मरीज खेतों में काम करते समय तेज धार वाले दराट की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गया था। हादसे में उसका बायां हाथ लगभग पूरी तरह कट गया था। गंभीर हालत में मरीज को तत्काल कुल्लू अस्पताल से एम्स बिलासपुर रेफर किया गया। एम्स पहुंचने के बाद चिकित्सकों ने बिना देरी किए मरीज को स्थिर किया और आपातकालीन सर्जरी शुरू की।
करीब सात घंटे तक चली इस जटिल सर्जरी में चिकित्सकों ने हड्डियों को जोड़ने के साथ-साथ कटी हुई धमनियों, नसों और टेंडन की सूक्ष्म मरम्मत की। रिवैस्कुलराइजेशन प्रक्रिया के माध्यम से हाथ में दोबारा रक्त संचार बहाल किया गया, जिससे हाथ को बचाने और उसकी कार्यक्षमता वापस लाने की संभावना बनी।
सर्जरी का नेतृत्व डॉ. नवनीत शर्मा ने किया। ऑपरेशन में डॉ. बिनीत, डॉ. शिवानी, डॉ. हरलीन और डॉ. ईश्वर्या ने सहयोग किया। वहीं एनेस्थीसिया टीम की ओर से डॉ. मार्कंडेय प्रसाद, डॉ. सचिन और जूनियर रेजिडेंट डॉ. हिमांशु ने विशेषज्ञ पेरीऑपरेटिव प्रबंधन प्रदान किया।
सर्जरी के बाद मरीज के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ और उपचार के दसवें दिन उसे अस्पताल से सफलतापूर्वक छुट्टी दे दी गई। चिकित्सकों के अनुसार इस तरह के मामलों में समय पर उपचार और रक्त संचार को जल्द बहाल करना बेहद महत्वपूर्ण होता है।
सफल सर्जरी के बाद डॉ. नवनीत शर्मा ने कहा कि इस तरह की आपात स्थिति में समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप नितांत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि त्वरित उपचार से गंभीर रूप से घायल अंग को बचाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
एम्स बिलासपुर की इस उपलब्धि को हिमाचल प्रदेश में जटिल प्लास्टिक एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह सर्जरी संस्थान में उपलब्ध उन्नत तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं और जटिल आपातकालीन मामलों के उपचार की क्षमता को भी दर्शाती है।
