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शिमला, 04 जुलाई। देवभूमि हिमाचल के गांवों को स्वच्छ, सुंदर और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य में पहली बार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह के नेतृत्व में हर ग्राम पंचायत में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन समिति के गठन की अनूठी पहल की गई है। तेजी से बदलती जीवनशैली, बढ़ती आबादी और प्लास्टिक के अंधाधुंध इस्तेमाल के कारण गांवों में कूड़े की समस्या गंभीर हो चुकी थी। पुराने तरीकों से इस संकट से निपटना नामुमकिन हो गया था, जिसके चलते अब जनभागीदारी पर आधारित इस नई और वैज्ञानिक व्यवस्था की शुरूआत की गई है।
बता दें कि हर दिन घरों और बाजारों से निकलने वाला कचरा अगर सही तरीके से न संभाला जाए, तो वह गंदगी, खतरनाक बीमारियों और पर्यावरण प्रदूषण का कारण बनता है। गांवों के प्राकृतिक सौंदर्य और लोगों के स्वास्थ्य को बचाने के लिए पंचायत स्तर पर एक मजबूत और जवाबदेह व्यवस्था की सख्त जरूरत थी। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए सरकार ने यह समिति बनाने का बड़ा फैसला लिया है।
हर महीने होंगी 2 बैठकें, गीले-सूखे कचरे पर रहेगा फोकस
इस नई समिति का मुख्य काम हर गांव के लिए स्वच्छता का एक ठोस और व्यावहारिक एक्शन प्लान तैयार करना होगा। समिति ग्रामीणों में गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग करने की आदत को बढ़ावा देगी और जमीनी स्तर पर कार्यों की लगातार मॉनिटरिंग करेगी। समिति सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे, इसके लिए हर महीने कम से कम दो बैठकें आयोजित करना अनिवार्य किया गया है। इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें आधी आबादी को मुख्यधारा में लाया गया है। पूरे गांव के सहयोग से कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन को लागू करने के लिए इस समिति में कम से कम 50 प्रतिशत भागीदारी महिलाओं की सुनिश्चित की गई है।
सरकार का मानना है कि गांव को स्वच्छ बनाने का जिम्मा केवल किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे समाज का है। इस समिति को पारदर्शी और असरदार बनाने के लिए कड़े नियम तय किए गए हैं। समिति में समाज के हर वर्ग की नुमाइंदगी होगी, जिसमें पंचायत प्रतिनिधि, उपप्रधान, सचिव, वार्ड सदस्य, स्वयं सहायता समूह, महिला मंडल, युवक मंडल, आशा वर्कर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, शिक्षक और सफाई कर्मचारी शामिल रहेंगे।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने इस दूरदर्शी योजना पर बात करते हुए कहा कि एक स्वच्छ गांव की शुरूआत किसी एक व्यक्ति से नहीं, बल्कि पूरे गांव के प्रयासों से होती है। उन्होंने कहा कि इस पहल को सफल बनाने के लिए अब प्रत्येक जनप्रतिनिधि और नागरिक को इसे अपनी सांझा जिम्मेदारी मानकर आगे आना होगा। मंत्री ने सभी से आह्वान किया कि इस महाअभियान का हिस्सा बनें और देवभूमि हिमाचल को देश के सामने एक आदर्श और स्वच्छ राज्य के रूप में पेश करें।
