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शिमला, 03 जुलाई। हाईकोर्ट ने सड़कों के किनारे दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को डंप करने और उनके कारण लगने वाले जाम पर कड़ा संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
अदालत के ध्यान में लाया गया कि पुलिस विभाग दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को नैशनल हाईवे से एयरपोर्ट की तरफ जाने वाली सड़क पर डंप कर रहा है। स्थिति इतनी गंभीर है कि लगभग 500 मीटर से अधिक के हिस्से में सड़क के दोनों तरफ कतारों में कबाड़ वाहन खड़े कर दिए गए हैं।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि एयरपोर्ट को जाने वाली इस मुख्य सड़क की हालत बेहद खराब है और इसे तुरंत मुरम्मत की आवश्यकता है। खंडपीठ को सूचित किया गया कि इसी तरह की समस्या शिमला के चक्कर स्थित जिला अदालत के पास भी है। वहां भी सड़क के किनारे एक लंबे पैच पर दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को लावारिस हालत में डंप कर दिया गया है, जिससे राहगीरों और वकीलों को परेशानी हो रही है।
हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि नैशनल हाईवे के किनारे या उनके सड़क के अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल यात्रियों की कीमत पर ऐसे वाहनों को खड़ा करने के लिए नहीं किया जा सकता। पुलिस विभाग को सड़कों से दूर किसी वैकल्पिक या चिन्हित डंपिंग साइट की तलाश करनी होगी, ताकि कबाड़ वाहनों को वहां स्थानांतरित किया जा सके।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने सचिव (गृह), पुलिस अधीक्षक शिमला और अधीक्षण अभियंता शिमला सर्कल को मामले में पक्षकार बनाते हुए अगली सुनवाई से पहले एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त 2026 को तय की गई है।
