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हाईकोर्ट के फैंसले को चुनौती देने सुप्रीम कोर्ट पहुंची हिमाचल सरकार, हजारों कर्मचारियों से जुड़ा है मामला

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शिमला, 04 जून। हिमाचल प्रदेश सरकार ने अनुबंध कर्मचारियों की सेवा शर्तों से जुड़े हिमाचल प्रदेश भर्ती एवं सरकारी कर्मचारी सेवा शर्तें अधिनियम-2024 को रद्द करने के हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर कर हाई कोर्ट के 25 अप्रैल 2026 के फैसले को चुनौती दी है।

गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण निर्णय में हिमाचल प्रदेश भर्ती एवं सरकारी कर्मचारी सेवा शर्तें अधिनियम-2024 को असंवैधानिक ठहराते हुए रद्द कर दिया था। अदालत ने स्पष्ट कहा था कि इस अधिनियम के आधार पर राज्य सरकार और उसके अधिकारियों द्वारा की गई सभी कार्रवाई, आदेश और निर्णय अवैध, असंवैधानिक तथा शून्य माने जाएंगे।

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि प्रभावित कर्मचारियों को उनके सभी लंबित वेतन, भत्ते, सेवा लाभ और अन्य देय सुविधाएं तीन महीने के भीतर प्रदान की जाएं। अदालत के इस आदेश को कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत माना गया था।

कर्मचारियों ने दी थी कानूनी चुनौती

इस पूरे मामले की शुरुआत शिक्षा विभाग के कर्मचारियों द्वारा हाई कोर्ट में दायर याचिकाओं से हुई थी। कर्मचारियों का तर्क था कि वर्ष 2024 में लाया गया यह अधिनियम उनके संवैधानिक और सेवा संबंधी अधिकारों का हनन करता है। बाद में इस मामले से जुड़ी कई अन्य याचिकाएं भी अदालत में दाखिल हुईं, जिनकी संयुक्त सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने कानून को रद्द करने का फैसला सुनाया था।

अब सुप्रीम कोर्ट में होगी अंतिम कानूनी लड़ाई

हाई कोर्ट के फैसले के बाद राज्य सरकार ने इसे चुनौती देने का निर्णय लिया और अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सरकार का मानना है कि अधिनियम प्रशासनिक सुधारों और भर्ती प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से लाया गया था, जबकि कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इससे कर्मचारियों के अधिकार प्रभावित हुए हैं।

अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि हाई कोर्ट का फैसला बरकरार रहेगा या राज्य सरकार को राहत मिलेगी। इस मामले का असर प्रदेश के हजारों सरकारी कर्मचारियों और भर्ती प्रक्रियाओं पर पड़ सकता है।

संभावित असर

हजारों अनुबंध कर्मचारियों के सेवा लाभों पर पड़ेगा प्रभाव।

बकाया वेतन और अन्य लाभों के भुगतान का मुद्दा जुड़ा।

भर्ती और नियमितीकरण से संबंधित कई मामलों पर पड़ सकता है असर।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भविष्य की सरकारी भर्ती नीतियों की दिशा भी तय हो सकती है।

फिलहाल, हिमाचल की कर्मचारी राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े इस महत्वपूर्ण मामले पर सुप्रीम कोर्ट के आगामी रुख का इंतजार किया जा रहा है।

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