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शिमला, 29 जून। प्रदेश सरकार पंचायतों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रही है। इसके तहत पंचायत चुनाव में पराजित उम्मीदवार अब विपक्ष की भूमिका निभाते हुए पंचायतों में होने वाले विकास कार्यों की निगरानी करेंगे। यदि किसी कार्य में अनियमितता या सुधार की आवश्यकता महसूस होती है तो वे अपने सुझाव और शिकायतें संबंधित जिला उपायुक्त (डीसी) को भेज सकेंगे।
सरकार का मानना है कि पंचायत चुनाव लड़ने वाले सभी उम्मीदवार स्थानीय समस्याओं और लोगों की जरूरतों से भली-भांति परिचित होते हैं। ऐसे में चुनाव हारने वाले उम्मीदवार भी रचनात्मक भूमिका निभाकर विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में योगदान दे सकते हैं। प्रशासन समय-समय पर प्राप्त सुझावों और शिकायतों के आधार पर जांच कर आवश्यक कार्रवाई करेगा।
प्रदेश सरकार जल्द ही इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी करेगी। पंचायतों में खर्च होने वाले प्रत्येक रुपये की निगरानी सुनिश्चित की जाएगी और यदि किसी पंचायत में विकास कार्यों में अनियमितता की शिकायत मिलती है तो उसकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच केंद्र सरकार से 16वें वित्त आयोग के तहत प्रदेश की पंचायतों के विकास कार्यों के लिए 400 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अगले महीने तक जारी होने की संभावना है। यह धनराशि पेयजल, सड़क, स्वच्छता, नालियां, सामुदायिक भवन, वर्षा जल निकासी, स्ट्रीट लाइट, पर्यावरण संरक्षण तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं के विकास पर खर्च की जाएगी।
सरकार का कहना है कि जनप्रतिनिधियों के साथ चुनाव हारने वाले उम्मीदवारों की सक्रिय भागीदारी से पंचायतों में स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा मजबूत होगी और विकास कार्यों में पारदर्शिता के साथ जनता का विश्वास भी बढ़ेगा।
