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पंचायत चुनाव लड़ने की कर रहे है तैयारी? जान लें यह नियम नहीं तो होगी जमानत जब्त

Anil Kashyap
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न्यूज अपडेट्स 
शिमला, 11 अप्रैल। हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के आगामी चुनावों को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। इन चुनावों में ताल ठोकने वाले प्रत्याशियों के लिए जीत-हार के साथ-साथ अपनी जमानत राशि सुरक्षित रखना भी एक अहम पहलू होगा। चुनाव नियमों के अनुसार मैदान में उतरने वाले किसी भी उम्मीदवार को अपनी जमानत राशि बचाने के लिए कुल पड़े मतदान का कम से कम 6 फीसदी वोट हासिल करना अनिवार्य होगा। यदि कोई प्रत्याशी इस निर्धारित 6 प्रतिशत की सीमा से कम वोट प्राप्त करता है, तो उसकी जमानत राशि जब्त कर ली जाएगी।

चुनाव आयोग द्वारा यह कड़ा प्रावधान चुनाव प्रक्रिया को अधिक गंभीर और अनुशासित बनाए रखने के उद्देश्य से लागू किया गया है। इसका मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि चुनाव मैदान में केवल सक्षम और गंभीर उम्मीदवार ही हिस्सा लें। अक्सर देखा जाता है कि कई लोग केवल औपचारिकता निभाने या अन्य प्रत्याशियों के वोटों का बंटवारा करने के लिए चुनाव में खड़े हो जाते हैं। इस नियम के लागू होने से ऐसे गैर-गंभीर उम्मीदवारों पर लगाम लगेगी।

चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों के लिए पद के अनुसार अलग-अलग जमानत राशि निर्धारित की गई है। इसके तहत जिला परिषद सदस्य के चुनाव के लिए 200 रुपए और पंचायत समिति सदस्य के लिए 150 रुपए की जमानत राशि जमा करवानी होगी। इसी तरह ग्राम पंचायत के प्रधान और उप-प्रधान पद के लिए भी जमानत राशि 150 रुपए तय की गई है। वहीं, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के उम्मीदवारों को इसमें छूट दी गई है और उन्हें सामान्य वर्ग के मुकाबले आधी जमानत राशि ही जमा करवानी होगी।

जमानत जब्त होने के इस नियम के संदर्भ में वर्ष 2012 का चमियाणा जिला परिषद चुनाव एक बेहद दिलचस्प और महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है। उस समय इस सीट से करीब 11 प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतर गए थे, जिसके कारण वोटों का भारी बंटवारा हुआ था। इसका परिणाम यह रहा कि कोई भी प्रत्याशी 6 फीसदी से अधिक वोट हासिल नहीं कर सका था। हैरानी की बात यह थी कि चुनाव जीतने वाले उम्मीदवार को भी कुल मतदान के 6 फीसदी से कम वोट मिले थे। हालांकि, नियमों के तहत विजेता प्रत्याशी को जमानत जब्ती से राहत मिल गई थी, जबकि चुनाव हारने वाले अन्य सभी प्रत्याशियों की जमानत राशि जब्त हो गई थी।

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