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मंडी, 14 अप्रैल। मैं प्रतिदिन की तरह गोपालपुर कालेज जाने के लिए सिया का इंतजार मौही गांव के बस स्टाप पर कर रही थी। हम दोनों मोबाइल फोन पर बात कर रही थीं। सिया ने बताया कि वह मोड़ तक पहुंच गई है और दो मिनट में बस स्टाप तक पहुंच जाएगी। इतने में उसके दो बार चीखने की आवाज सुनाई दी।
मुझे लगा कुत्ते उसके पीछे पड़ गए हैं। मैं उसे देखने के लिए भागी। वहां पहुंचकर देखा कि सिया जमीन पर खून में लथपथ पड़ी थी। मुझे आसपास कोई नहीं दिखा। मैं उसे देखकर घबरा गई और तुरंत अपने पापा को काल की।
हम दोनों प्रतिदिन साथ ही कालेज जाती थीं। वह भी बीवाक द्वितीय वर्ष की छात्रा थी। सिया नैण गांव से मौही बस स्टाप के लिए पैदल आती थी। आज तक भी कोई ऐसी बात नहीं हुई कि किसी ने तंग किया हो या कुछ कहा हो। अगर कोई कुछ कहे भी तो जवाब देना जानती थी।
घर से निकलते ही वह मुझे मोबाइल फोन पर काल कर देती कि आ रही है। रोज की तरह ही मैंने उसे पूछने के लिए कॉल की थी। अब उसकी चीख कानों में सुनाई दे रही। सिया अपने साथ पर्स नहीं रखती थी। केवल बस का किराया देने के लिए ही पैसे रखती थी। इसके अलावा कुछ भी सामान खरीदती थी तो आनलाइन भुगतान ही करती थी। मुझे समझ नहीं आया कि उस पर हमला क्यों किया गया? क्यों उसे बेरहमी से मार डाला?
