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शिमला, 03 अप्रैल। हिमाचल प्रदेश सरकार ने पिछले तीन वर्षों के दौरान राज्य अतिथियों के आतिथ्य सत्कार पर होने वाले खर्च की विस्तृत जानकारी साझा की है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में वीआईपी मेहमानों के ठहराव पर 4.86 करोड़ रुपये और उनकी गाड़ियों की व्यवस्था पर 1.65 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं। ये जानकारी मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की ओर से दी गई है।
प्रमुख नेताओं के दौरों पर हुआ खर्च
सदन में दी गई जानकारी के अनुसार, विभिन्न राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं के दौरों पर महत्वपूर्ण राशि खर्च की गई है:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी: 26 अप्रैल 2026 को सिरमौर दौरे के दौरान उनके आवासीय प्रबंध पर 6.10 लाख और वाहनों पर 9.76 लाख रुपये खर्च हुए।
सांसद राजीव शुक्ला: जनवरी 2023 और फरवरी 2024 के दौरों को मिलाकर इनके ठहरने और वाहनों पर करीब 9 लाख रुपये का व्यय हुआ।
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी: सितंबर 2023 में शिमला प्रवास के दौरान सर्किट हाउस में 36,910 रुपये खर्च हुए, जबकि उन्होंने वाहन का प्रबंध स्वयं किया।
नितिन गडकरी व जेपी नड्डा: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के अगस्त 2023 के प्रवास पर 39,605 रुपये खर्च हुए। वहीं, केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के विभिन्न दौरों पर ठहरने और गाड़ियों पर करीब 1.35 लाख रुपये व्यय हुए।
दिग्विजय सिंह : पार्लियामेंटरी कमेटी के अध्यक्ष जब दो मई 2025 को शिमला आए तो उनके ठहराव पर 43,290 रुपये और गाड़ी पर 10,503 खर्च हुए।
हिमाचल मूल के नेताओं और अन्य का सत्कार
रिपोर्ट में हिमाचल से ताल्लुक रखने वाले दिग्गज नेताओं के खर्च का भी उल्लेख है:
अनुराग ठाकुर: तत्कालीन केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के 2023 और 2024 के दौरों के दौरान उनके ठहरने से ज्यादा गाड़ियों पर खर्च हुआ, जो कुल मिलाकर 11 लाख रुपये से अधिक रहा।
आनंद शर्मा: पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा राज्य अतिथि बनाए गए तो उनके 2023 के दौरे पर ठहरने और वाहन व्यवस्था पर कुल 65,052 रुपये खर्च किए गए।
सचिन पायलट: 12 अक्तूबर 2025 को उनके प्रवास के दौरान केवल गाड़ी का खर्च (8,302 रुपये) सरकार ने वहन किया, रहने की व्यवस्था उन्होंने स्वयं की।
विविध श्रेणियों में भी हुआ व्यय
वर्ष 2025-26 के दौरान भी कांग्रेस और भाजपा के कई नेताओं के अलावा विभिन्न राज्यों के न्यायाधीशों और उच्चाधिकारियों को राज्य अतिथि का दर्जा दिया गया। सरकार ने स्पष्ट किया कि ये खर्च स्थापित प्रोटोकॉल और राजकीय नियमों के तहत किए गए हैं।
